फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पालीटेक्निक के प्रवक्ता के इस्तीफे से खलबली

विज्ञापन
विज्ञापन
सितारगंज। राजकीय पॉलीटेक्निक के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेड के प्रवक्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका आरोप है कि विभाग ने ट्रांसफर एक्ट के मुताबिक उनका स्थानांतरण नहीं किया, जिससे क्षुब्ध होकर उन्होंने डायरेक्टर को इस्तीफा भेजा है। प्रवक्ता के इस तरह से अपने पद से इस्तीफा देने से तकनीकी शिक्षण विभाग में खलबली मची हुई है। बता दें कि प्रवक्ता की सेवानिवृत्ति में अभी 11 वर्ष शेष हैं।
विज्ञापन


राजकीय पॉलीटेक्निक में कार्यरत रहे इलेक्ट्रॉनिक ट्रेड के प्रवक्ता एमके वर्मा ने बताया कि वह मूलरूप से महानगर कॉलोनी लखनऊ के निवासी हैं। वह अप्रैल 1998 में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर भर्ती हुए और पहली पोस्टिंग देहरादून राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में हुई। 19 जुलाई 2008 को राजकीय ग्रामीण पॉलीटेक्निक कॉलेज पौड़ी गढ़वाल से स्थानांतरित होकर यहां आए।

वर्मा ने बताया कि मई में उन्होंने स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था, जिसमें पांच कॉलेजों के विकल्प दिए गए थे। उन्होंने कोटाबाग (दुर्गम क्षेत्र) के लिए आवेदन किया था। वर्मा का आरोप है कि विभाग ने आठ जून को ट्रांसफर एक्ट के मुताबिक स्थानांतरण न कर उन्हें द्वाराहाट के लिए स्थानांतरित कर दिया, जबकि कोटाबाग के बाद सल्ट का विकल्प खाली है।
विज्ञापन


नियम के मुताबिक कोटाबाग के बाद सल्ट कॉलेज के लिए स्थानांतरण होना चाहिए था। वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों का उत्पीड़न कर रही है। प्रवक्ता वर्मा ने बताया कि स्थानांतरण के दो दिन बाद उन्होंने 10 जून को तकनीकी शिक्षा डायरेक्टर पंकज पांडेय को पारिवारिक परेशानियों का हवाला देते हुए इस्तीफा भेज दिया है, जबकि, नवंबर 2029 में उनकी सेवा समाप्त हो रही है।

निदेशक कार्यालय से इस्तीफा स्वीकृत होने या न होने का अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। इधर, 12 जून को प्रधानाचार्य ओंकार नाथ कोष्टा ने प्रवक्ता एमके वर्मा को द्वाराहाट के लिए कार्यमुक्त कर दिया था। प्रवक्ता के इस तरह से इस्तीफा देने से विभाग में खलबली मची हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक ट्रेड के प्रवक्ता एमके वर्मा का शासन से आठ जून को द्वाराहाट के लिए स्थानांतरण किया गया। इसके बाद सरकार का आदेश मानते हुए 12 जून को उन्हें द्वाराहाट के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया था। उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है। शासन को ही इस्तीफे पर निर्णय लेना है। स्थानांतरण एक्ट के तहत स्थानांतरण न होने के आरोप पर भी शासन से ही फैसला होगा।
विज्ञापन

-ओंकार नाथ कोष्टा, प्रधानाचार्य, राजकीय पॉलीटेक्निक कालेज सितारगंज (यूएस नगर)
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें