रामनगर (नैनीताल)। सेना पदक विजेता हवलदार शमशेर सिंह का उनके जन्मदिन के अवसर पर बुधवार को पूर्व सैनिकों ने किया सम्मानित किया।
सेना पदक विजेता शमशेर सिंह की यूनिट 7वीं गढ़वाल रायफल्स की 1998 में जम्मू कश्मीर की सीमा बांदीपुरा में तैनात थी। 16 अप्रैल को रात दस बजे कमान अधिकारी को सूचना मिली कि सीमा पर आतंकी बंकर बनाकर रात में घुसपैठ करेंगे। कमान अधिकारी ने तत्काल सूबेदार बलवीर सिंह के नेतृत्व में शमशेर सिंह के साथ सात सदस्यों की टीम का गठन किया। तीन घंटे पैदल चलने के बाद जब टीम घने जंगल में पहुंची तो पहाड़ी के ऊपर से उन पर फायरिंग होने लगी।
दुश्मन की जानकारी के लिए नायक शमशेर सिंह अकेले पहाड़ी पर चढ़ गए, जहां एक आतंकी जमीन पर लेटकर रुक-रुक कर फायरिंग कर रहा था। उन्होंने पलक झपकते ही खुखरी से आतंकी का गला रेत दिया और अपने टीम को चोटी पर बुलवाया।
इस ऑपरेशन में टीम ने कुल छह अफगानी आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था, जिसमें से चार आतंकियों को अकेले शमशेर सिंह ने मारा था। वहां से दो ट्रक भरकर गोला बारूद बरामद किया गया। 15 अगस्त 1998 को शमशेर सिंह को उनके अदम्य साहस के लिए सेना पदक (वीरता) पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर पूर्व सैनिक उत्थान एवं कल्याण समिति के अध्यक्ष सूबेदार मेजर नवीन पोखरियाल, संरक्षक कैप्टन हरगोविंद पांडे, उपाध्यक्ष कुलवंत सिंह, सचिव खीम सिंह रावत, उपसचिव भूपाल राम, कोषाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद पांथरी, कैप्टन बहादुर सिंह भंडारी (सेना पदक), कैप्टन पूरन सिंह बिष्ट, दामोदर जोशी, ब्लॉक प्रतिनिधि चंद्र मोहन सिंह मनराल, भगवत सिंह चौहान, त्रिलोक सिंह नेगी, सुंदर सिंह राजेश मौजूद थे।
सेनापदक विजेता को जन्मदिन पर किया सम्मानित
1998 में चार आतंकियों को अकेले मौत के घाट उतारा था