मालधनचौड़ (नैनीताल)। देश की आजादी के छह दशक बाद भी कॉर्बेट लैंडस्केप में बसे वनग्रामों में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकीं हैं। काबिज भूमि पर वैधानिक स्वामित्व का अभाव इन गांवों के विकास में बाधक है।
अनुसूचित जाति बहुल मालधनचौड़ क्षेत्र के शिवनाथपुर नईबस्ती, पुरानी बस्ती, कुमुगडार, पटरानी, नत्थावली आदि वनग्रामों में करीब 14000 लोग रहते हैं। इन क्षेत्रों में दो हाईस्कूल, छह प्राथमिक विद्यालय हैं लेकिन कही पर भी न सड़क है, न बिजली और स्वास्थ्य सुविधा। पक्के मकान बनाने की अनुमति नहीं है। शुद्ध पेयजल, संचार सुविधा से भी लोग महरूम हैं, हालांकि कम गहराई पर लगाए गए हैंडपंप का गंदा पानी पीने को विवश हैं। इससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं लोग ...
ग्रामीण सुनीता देवी का कहना है कि यदि बरसात में स्वास्थ्य खराब हो जाए तो कीचड़ की वजह से गाड़ी वाला नहीं आता है।
दयाल चंद कहते हैं कि कांग्रेस ने हमारी रास्ते में बजरकुट से गड्ढे तो भर देती थी लेकिन भाजपा सरकार ने तो कुछ भी नहीं किया।
साधुराम कहते हैं कि उनका जन्म यहीं हुआ। तब से कई सरकारें आईं और गईं। सबने आश्वासन दिया, वोट लिया लेकिन जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता है।
गोपुली देवी कहती है कि अगर हमारा गांव सड़क से जुड़ा होता तो हमारे बच्चे भी रोजगार कर सकते थे।
हरीश धोनी कहते हैं हमारे बच्चों ने शुद्ध पानी कभी पिया ही नहीं। हैंडपंप से ही काम चलाना पड़ता है।
परमेश्वरी देवी बताती हैं कि कि बच्चों को इंटर की कक्षा में पढ़ने के लिए घने जंगल के बीच चार किमी दूर ढेला गांव जाना पड़ता है। कीचड़ की वजह से बच्चे रोजाना स्कूल नहीं जा जाते हैं।