नैनीताल। कागजों में एक साल के दौरान नैनी झील पर खर्च करने के लिए लगभग दस करोड़ की घोषणाएं हो चुकी हैं। बजट आवंटन संबंधी पत्र भी विभाग को भेज दिए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट रही। अब खुलासा हुआ है कि सरकार सिर्फ कागजों में बजट आवंटित कर रही है। अभी तक सिंचाई विभाग के पास दस करोड़ में से दस रुपये भी नहीं पहुंचे हैं। सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। बजट देने की घोषणा करके सिर्फ झूठी वाहवाही लूटी जा रही है।
जीवनदायिनी नैनी झील का गिरता जलस्तर बीते कई सालों से राज्य की चिंता का विषय है। अधिकारी से लेकर मंत्री और मुख्यमंत्री तक झील को बचाने की गुहार की जा चुकी है। झील को बचाने के लिए दो साल से बैठकों का दौर जारी है। अब तक झील को लेकर कितने दौर की बैठकें हो चुकी होंगी यह कह पाना मुश्किल है। झील को बचाने के लिए सिर्फ बैठकें नहीं हुईं बल्कि सरकार ने तत्परता भी दिखाई। नौ जून 2017 को झील की सफाई व अन्य कार्यों के लिए मुख्यमंत्री ने तीन करोड़ रुपये देने की घोषणा कर दी।
इसी तरह जून 2017 के आसपास ही झील को बचाने लिए अमृत योजना से लगभग साढ़े सात करोड़ रुपये आवंटित किए गए। यह पैसा कई महीने पहले सिंचाई विभाग को मिल जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। साढ़े सात करोड़ में से सात रुपये भी अभी तक सिंचाई विभाग के पास नहीं आ सके हैं, जिन्हें खर्च करके विभाग कुछ कार्य करवा सके। सरकार सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ा रही है। शासन से नाला सफाई, नाला जीर्णोद्धार आदि के आदेश ही आते रहते हैं, लेकिन बजट नहीं मिलता। जबकि काम कराने के लिए निर्देशों के साथ साथ पैसे की भी जरूरत है।
अमृत योजना के तहत सात करोड़ 27 लाख और मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत तीन करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को मिलने हैं। प्रक्रिया चल रही है। डीपीआर शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक सिंचाई विभाग के पास पैसा नहीं आ सका है।
-हरीश चंद्र सिंह, ईई सिंचाई विभाग।
अमृत योजना के तहत सात करोड़ 27 लाख रुपये सिंचाई विभाग को देने के लिए आए हैं। यह बजट आवंटित ही माना जाएगा। सिंचाई विभाग ने इसकी डीपीआर बनाकर शासन को भेजी तो दो बार आपत्ति लगकर वापस आ गई। उम्मीद है कि जल्द ही शासन से यह पैसा जारी हो जाएगा।
-चंद्र सिंह, नोडल अधिकारी, अमृत योजना।
सिर्फ कागजों में ही मिलता रहा नैनी झील को बजट
- एक साल के दौरान कागजों में झील को मिले करोड़ों रुपये
- लेकिन विभाग के पास अभी तक नहीं आया धेला