नैनीताल। कमिश्नर राजीव रौतेला ने शुक्रवार को नैनी झील को भरने वाली सूखाताल झील का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि नैनीझील जहां पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है वहीं देवभूमि उत्तराखंड की शान मानी जाती है। जबकि पिछले कुछ वर्षों से कम वर्षा अनावश्यक झील से पानी के दोहन, कूड़े कचरे की वजह से नैनीझील का स्तर गिरता जा रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो झील का अस्तित्व संकट में आ जायेगा।
झील के संरक्षण एवं पानी के स्तर को बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार एवं प्रशासन द्वारा जनसहयोग से कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने कहा कि सूखाताल में भंडारित होने वाला जल नैनीझील को सिंचित करते हुए जलापूर्ति करता है। नैनीझील में बरसात में फिजूल बहने वाले जल समूह को नैनीझील में डायवर्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम सभी का उद्देश्य होना चाहिये कि वर्षाजल को नैनीझील तक पहुंचाएं ताकि झील लबालब भरी रहे और इसका स्तर कम न हो। झील में आने वाले तमाम नालों की सफाई की गई और पेयजल में कटौती की गई। इसके फलस्वरू झील का स्तर बीते वर्षों की अपेक्षा संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि सूखाताल में वर्षाकाल के जल को संग्रहण करने के लिए करीब तीन मीटर खुदाई कर पानी को संकलित किया जाएगा, जिससे नैनीझील रिचार्ज होगी। आयुक्त ने कहा कि सूखाताल से अतिक्रमण हटाने, नये अतिक्रमण को रोकने के लिये झील विकास प्राधिकरण रणनीति तैयार कर रहा है। इसके लिये प्राधिकरण को वीडियो रिकॉर्डिंग कर दस्तावेज बनाने को कहा गया है। इस दौरान एडीएम हरबीर सिंह, एसई सिंचाई एनएस पतलिया, ईई लोनिवि चंदन सिंह नेगी, पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत, एई सिंचाई एमएम जोशी, गोपाल सिंह रावत आदि थे।