नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को मानसिक रूप से बीमार लोगों के पुनर्वास के संबंध में नीति बनाने और ऐसे लोगोें के समुचित इलाज और सुरक्षा की व्यवस्था करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने हरिद्वार निवासी डॉ. विजय वर्मा की जनहित याचिका पर राज्य सरकार के लिए कई निर्देश जारी किए। कोर्ट ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि इलाज के लिए मानसिक रोगी पर विद्युत कंरट का इस्तेमाल बगैर एनेस्थीशिया व उसके परिजनों की सहमति के न किया जाए। सख्ती से सुनिश्चित किया जाए कि किसी सरकारी अथवा निजी आवास में भी मानसिक रोगी चेन से बांधकर अथवा तन्हाई में न रखा जाए।
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे की अब से कोई भी मानसिक रूप से बीमार, मानसिक विकलांग सड़कों पर घूमता हुआ न मिले। एसएसपी और एसपी ऐसे व्यक्ति को तुरंत नजदीक के मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराएं।
रुद्रपुर की चांदनी और रुद्रप्रयाग के पंकज को जंजीरों से आजाद कराओ
कोर्ट ने रुद्रपुर में सुभाष कालोनी निवासी चांदनी और रुद्रप्रयाग के युवक पंकज राणा को जंजीर से बांधकर रखे जाने की घटनाओं का संज्ञान भी लिया। कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी और एसएसपी ऊधमसिंह नगर चांदनी को छह घंटे के अंदर जंजीरों से आजाद कराएं और 24 घंटे के अंदर इसे सेलाकुई अस्पताल में भर्ती कराएं।
जिलाधिकारी और एसएसपी रुद्रप्रयाग पंकज राणा को जंजीरों से आजाद कराएं और 24 घंटे के अंदर उसे एम्स ऋषिकेश में भरती कराएं। जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर और जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग को चांदनी और पंकज राणा के अभिभावकों को 50-50 हजार रुपये का भुगतान करने और प्रतिमाह 5500 रुपये देने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने ऊधमसिंह नगर के जिलाधिकारी नीरज खैरवाल और एसएसपी सदानंद दांते को ईमानदार अधिकारी बताया और दोनों को मानसिक रूप से बीमार चांदनी का विधिक अभिभावक (लोको पैरेंट्स) घोषित किया है।
मानसिक रोगियों को मिले समुचित इलाज और सुरक्षा
हाईकोर्ट ने ऐसे रोगियों को बेड़ियों से आजाद करने को कहा
ताकि खुल के खिलेे चांदनी और पंकज भी