नैनीताल। कार्बेट नेशनल पार्क के आसपास अवैध कब्जों के मामले में मुख्य सचिव ने बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट में प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया। कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह बाद करेगी।
कोर्ट में मुख्य सचिव की ओर से दिये गए प्रतिशपथ पत्र में कहा गया है कि सात अप्रैल को जिलाधिकारी नैनीताल ने रामनगर के आसपास रिजॉर्टों का भौतिक निरीक्षण किया है।
इस निरीक्षण में 44 होटलों के मालिकों की ओर से सरकारी भूमि, वन भूमि, सरकारी बंजर भूमि आदि पर कब्जे किया जाना पाया गया। कई रिजॅार्ट मालिकों ने वन क्षेत्र पर भी कब्जा किया है। 13 रिजॉर्ट संचालकों के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा करने के मामले में एसडीएम कार्यालय में 2012 से वाद लंबित हैं।
मुख्य सचिव ने यह प्रतिशपथ पत्र हिमालयन युवा ग्रामीण विकास समिति के अध्यक्ष की ओर से दाखिल जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देश पर दाखिल किया।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई की। याची का कहना था कि रामनगर क्षेत्र में कोसी नदी में अवैध कब्जा कर रिजॅार्टों का निर्माण कराया गया है। सीवर को नदी में बिना किसी ट्रीटमेंट के बहाया जा रहा है। पूर्व में कोर्ट में रामनगर के एसडीएम ने भी शपथ पत्र दाखिल किया था लेकिन कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ।
इनके हैं कब्जे
अधिवक्ता दुष्यंत मिलानी के मुताबिक मुख्य सचिव के जवाब से स्पष्ट है कि रेंजेज व्यूह बोहराकोट ने सरकारी भूमि, माइरिका आनंद वन ढिकुली ने सरकारी बंजर भूमि, क्यारी इन ने सरकारी, तरंगी रिजॉर्ट ने राजस्व भूमि पर, इनफिनिटी रिजार्ट ने बंजर जमीन, कार्बेट रिवर साइड ने वर्ग तीन व वर्ग चार, वाइल्ड क्रस्ट ने सरकारी, कार्बेट वाइल्ड रिवर वन्यां ने वर्ग तीन, टाइगर ट्रैक रिजार्ट ढिकुली ने सरकारी बंजर जमीन, कार्बेट गेटवे आमोद ने वर्ग चार व सरकारी जमीन, कार्बेट रामगंगा रिजार्ट मरचूला ने वन क्षेत्र, नदी क्षेत्र ,राजस्व भूमि की जमीनों और होटल सोल्लुना मरचूला ने बंजर जमीन पर कब्जा किया है।