शांतिपुरी/लालकुआं (नैनीताल)। टांडा जंगल में दवाई फार्म के निकट रविवार तड़के माल गाड़ी की चपेट में आने से छह साल की हथिनी की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना पर पहुंचे वन अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया। बाद में शव का पोस्टमार्टम कर दफना दिया है।
रविवार को ट्रेन पाइलट राजेश कुमार और सहायक पाइलट उदय कुमार शर्मा ने पंतनगर रेलवे स्टेशन को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि रविवार तड़के दो बजे वे लालकुआं से लाइट इंजन संख्या 14979 लेकर पंतनगर को रवाना हुए थे। रास्ते में किमी नंबर 60/4-3, केंद्रीय औषधीय और सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) नगला बाईपास के रेलवे ट्रैक पार कर रही एक मादा हाथी को इंजन ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि हथिनी 10 मीटर दूर जा गिरी और उसकी मौत हो गई। सुबह घास काटने आई महिलाओं की सूचना पर टांडा रेंजर बीएस मेहता मौके पर पहुंचे। उन्होंने वन अधिकारियों को हादसे की खबर दी। सूचना पर डीएफओ कल्याणी, एसडीओ यूसी तिवारी भी मौके पर पहुंचे और घटना का जायजा लिया। बाद में पशु चिकित्सक डॉ. वंदना यादव, डॉ. आयुष नयाल ने शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया गया है। इधर रेंजर ने कहा है कि रेलवे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
झुंड से बिछड़े छोटे हाथी, गंवा रहे जान
हल्द्वानी। वन्य विशेषज्ञों की माने तो हाथी आमतौर पर झुंड में रहने वाला वन्यजीव है। हाथी अपने बच्चों को परिपक्व होने तक झुंड में रखते हैं और आने-जाने के साथ भोजन का भी ध्यान रखते हैं। देखने में आया है कि तराई केंद्रीय वन प्रभाग में ट्रेन की चपेट में मारे जाने वाले हाथियों की उम्र महज चार से आठ बरस के बीच की है। यानी सभी हाथी शिशु हैं। वन्य विशेषज्ञों की माने तो टांडा जंगल से लालकुआं नेपाल की ओर जाने वाले एलीफेंट कॉरिडोर में नन्हे हाथी झुंड से बिछड़ जाते हैं। बाद में वे कॉरिडोर का रास्ता नहीं पहचान पाते हैं फिर ट्रैक पार करने के दौरान ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवा देते हैं।
पीसीसीएफ के आदेशों को भी किया नजर अंदाज
प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने हाल ही में ट्रेन से होने वाले हादसों में वन्यजीवों की मौतों को रोकने के लिए डीएफओ कल्याणी को विशेष निर्देश दिए थे। इसमें संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर ट्रेनों के आवागमन के दौरान गश्त कराने, हाथी ट्रैक को आसानी से पार कर सके इसलिए ट्रैक के आसपास मिट्टी की लेयर बनाने, ट्रैक के आसपास झाड़ी हटाने ताकि वन्यजीव दिखाई दे सके। इधर प्रमुख वन संरक्षक के जाते ही निर्देश भी गुम हो गए।
ढाई महीने पहले हुई थी हाथी की मौत
शांतिपुरी। टांडा के रेंजर बीएस मेहता ने बताया कि बीते 11 मार्च को घटनास्थल से 200 मीटर दूरी पर भी इसी ट्रैक पर ट्रेन से टकराकर हाथी की मौत हो गई थी। निकट भविष्य में वन्य जीवों की सुरक्षा के लिहाज से हाथी कॉरिडोर क्षेत्र को दीवार लगाकर सुरक्षित किया जाएगा। हालांकि पिछले साल भी ट्रेन से टकराकर दो हाथियों की मौत हो गई थी।