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ज्योलीकोट का वीरभट्टी पुल खतरे में

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ज्योलीकोट पुल - फोटो : अमर उजाला
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ज्योलीकोट (नैनीताल)। ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग कुमाऊं की लाइफ लाइन कहलाता है। वीरभट्टी में इस मार्ग पर बने बैली ब्रिज का अस्तित्व खतरे में है। पुल में बिछी प्लेटों को कसने, रोकने वाले नट, बोल्ट टूट रहे हैं। कुछ टेढ़े भी हो चुके हैं, प्लेटों के बीच दूरी बढ़ रही है। ऐसे में पर्यटन सीजन के बीच यह पुल दोबारा ध्वस्त होने का खतरा है।
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पिछले वर्ष 25 सितंबर 17 को गैस सिलिंडर भरे ट्रक में आग लगने के बाद हुए विस्फोट से वीरभट्टी पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। तब से इस मार्ग पर यातायात बंद रहा। वहां बैली ब्रिज बनाने के बाद दिसंबर 17 में पुल को यातायात के लिए खोला गया तो दूसरे दिन ही पुल सर्पिलाकार हो गया। एक ही दिन में इस बैली ब्रिज के पैनल टेढ़े-मेढे़ हो गए थे। इसे सुधारने के लिए 36 दिन में 40 लाख से ज्यादा रुपये खर्च हुए। तब एनएच के इंजीनियर नवनिर्मित बैली ब्रिज की उम्र मात्र दो तीन वर्ष बता रहे थे जबकि अगरतला त्रिपुरा से आए वरिष्ठ विशेषज्ञ स्वदेश शर्मा ने बताया था कि यदि जरूरी देखभाल हो तो बैली ब्रिज की उम्र 20 वर्ष तक होती है। तब इस पुल पर यातायात सुचारु करने के साथ पुल की देखरेख के कई दावे किए गए। एक बार में एक ही वाहन का प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए पुलिस चेकपोस्ट, सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया गया, लेकिन अब इस सब को बिसरा दिया गया। जिला मुख्यालय के नजदीक बने इस पुल की दीवारें टूटने लगी हैं। वीरान चेकपोस्ट, लावारिस बैली ब्रिज प्रशासन, विभाग की काहिली बयां कर रहा है। एनएच के एई केएस मेहता का कहना है कि ओवरलोड के कारण टूटे आठ नट, बोल्ट पिछले सप्ताह बदले गए हैं। पुल को कोई खतरा नहीं है जबकि पुल के कई नट, बोल्ट टूट गए हैं। टेढ़ी हो चुकी प्लेटों के बीच बढ़ता अंतराल चिंताजनक है।
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