नैैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर स्थित नैनोसाइंस एंड नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर में बेस्ट प्लास्टिक की अपसाइकिलिंग के लिए तैयार की गई स्वयं-भू डब्ल्यूआरएम 2021 मशीन को स्थापित करने काम अंतिम चरण में है। सेंटर के शोध छात्रों ने बीते दिनों मशीन का ट्रायल लिया।
इसमें उन्हें वेस्ट प्लास्टिक की अपसाइकिलिंग करने में प्रारंभिक सफलता प्राप्त हुई है। ट्रायल के दौरान करीब 20 किलो ग्रैफीन प्राप्त किया है।
परियोजना अधिकारी डॉ. नंद गोपाल साहू ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि इस प्रयोग को पूरा करने में दो साल का समय लगा। मशीन की क्षमता प्रतिदिन करीब 100 किलो प्लास्टिक के अपसाइकिलिंग की है। मशीन को शुरू करने के लिए ही डीजल का प्रयोग किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान प्लास्टिक से पैदा होने वाली जहरीली गैसें नहीं नकली हैं बल्कि पूरी प्रक्रिया के दौरान मशीन का संचालन इन्हीं गैसों से होता है। मशीन में 100 किलो प्लास्टिक से करीब 15 प्रतिशत ग्रैफीन और कुछ मात्रा में क्रुड ऑयल मिलता है और 10 हजार रुपये की लागत आती है।
डॉ. साहू की मानें तो एक ग्राम ग्रैफीन की कीमत करीब 67 हजार रुपये होती है। ये ग्रैफीन दवाओं और बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने में काम आता है। विभाग ये काम बंगलूरू की एक कंपनी के साथ मिलकर कर रहा है। उन्होंने इस प्रयोग में सरकार से सहायता की मांग की है और उद्योगों को भी आमंत्रित किया है। इस दौरान प्रो.एबी मेलकानी, भाष्कर बोरा, मनोज कड़ाकोटी, संदीप, नेहा, हिमानी आदि रहे।
मशीन को स्थापित करने का काम अंतिम चरण में, पहला प्रयोग सफल