नैनीताल। आधुनिकता की दौड़ में शामिल कुमाऊं विश्वविद्यालय एक कदम आगे बढ़ा रहा है। विवि ने अपने डीएसबी और एसएसजे परिसर को लोकल एरिया नेटवर्क (लैन) से जोड़ने की कवायद तेज कर दी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो दो महीने के भीतर विवि के दोनों परिसर तकनीक के माध्यम से आपस में जोड़ जाएंगे। अगर यह योजना सफल रही तो सूचना प्रौद्योगिकी के बल पर यहां के छात्र संचार की ताकत को आसानी से समझ सकेंगे।
भारत सरकार के डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नेशनल नॉलेज नेटवर्क योजना शुरू की थी। इससे देशभर के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, कृषि, स्वास्थ्य संस्थानों, पुस्तकालयों, प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ा जा सके। इस योजना के माध्यम से देशभर के शिक्षण संस्थानों, वहां पढ़ाई कर रहे छात्रों के बीच ज्ञान का एक नेटवर्क तैयार करना था, जिससे देशभर के छात्रों को नए प्रयोगों की आसानी से मुहैया कराई जा सके। देश के कई संस्थानों ने अपने कैंपसों को इस योजना से जोड़ लिया था, लेकिन कुविवि कुछ कारणों से अपने परिसरों को इससे नहीं जोड़ा जा सका था लेकिन अब विवि प्रशासन ने इस ओर कवायद तेज कर दी है। इस योजना के प्रथम चरण में विवि को एक जीबीपीएस की कनेक्टिविटी मिली थी, जिसके बाद अब विवि ने योजना के दूसरे चरण के तहत अपने डीएसबी कैंपस नैनीताल, एसएसजे कैंपस अल्मोड़ा कैंपस को लैन के माध्यम से जोड़ने की कवायद तेज कर दी है। लैन विकसित करने के लिए विवि ने बीएसएनएल के साथ 60 लाख का करार किया है, जिसमें से विवि प्रशासन ने 55 लाख का भुगतान कंपनी को कर चुका है। पिछले दिनों कंपनी की टीम ने दोनों परिसर का निरीक्षण कर चुकी है। इस योजना से दोनों कैंपसों के छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक के साथ फ्री वाईफाई की सुविधा मिल सकेगी।
छात्रों को फ्री वाईफाई की सुविधा मिलेगी
शोध छात्रों को लाभ मिलेगा
शोध छात्रों का कार्य होगा आसान
नैनीताल। विवि के दोनों परिसरों में लैन विकसत होने से यहां शोध कर रहे छात्रों को काफी लाभ मिलेगा। शोधार्थी छात्रों को विभिन्न प्रकाशकों की अध्ययन सामग्री और अन्य शोध पत्र भी आसानी से मिल जाएंगे। क्योंकि शोध छात्रों को शोध पत्र लेने के लिए पैसे चुकाने पड़ते हैं, इसके लागू होने से निशुल्क शोधपत्र मिल सकेंगे।
लैन विकसित करने को लेकर विवि के दोनों परिसरों में बीएसएनएल की टीम भ्रमण कर चुकी है। जल्द ही कंपनी सदस्यों के साथ बैठक की जाएगी। सब कुछ ठीक रहा तो दो महीने में इसकी सुविधा छात्रों को मिलने लगेगी।
- प्रो. संजय पंत, निदेशक डीआईसी कुविवि।