फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर तीन वर्षीय परियोजना शीघ्र

विज्ञापन
कौसानी से हिमालय में दिखाई देने सूर्यास्त का नजारा। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
नैनीताल। यूरोपियन यूनियन एवं इरोस्मस कार्यक्रम के तहत जर्मनी के ब्रिमन विश्वविद्यालय द्वारा आर्कटिक एवं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए भारत, भूटान और रूस में तीन वर्षीय परियोजना संचालित की जाएगी। परियोजना में अलग-अलग देशों के 9 विश्वविद्यालयों के साथ ही दो स्वयं सेवी संस्थाएं कार्य करेंगी। स्वयं सेवी संस्थाओं में भारत का प्रतिनिधित्व नैनीताल स्थित सेंट्रल हिमालयन इंवायरमेंट एसोसिएशन (चिया) करेगी।
विज्ञापन

चिया के अधिशासी निदेशक डा. पंकज तिवारी ने 15 से 17 फरवरी तक जर्मनी में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला से वापस आने के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना में यूरोपियन यूनियन व रूस के 3-3, भूटान का 1 और भारत के 2 विश्वविद्यालय (जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल) को शामिल किया गया है। डा. तिवारी ने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों द्वारा स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध के पाठ्यक्रम में उच्च हिमालयी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए समुचित बदलाव एवं नए अध्यायों को संकलित करना है। पाठ्यक्रम तैयार करते समय छात्रों, विकास संस्थानों, ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत समुदायों, समूहों एवं बुद्धिजीवियों के सुझाव एवं अनुभवों को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न स्तरों पर क्षमता विकास एवं जमीनी स्तर के अनुभवों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। कार्यशाला में डा. तिवारी के साथ जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रो. सतीश गड़कोटी एवं प्रो. पीके जोशी, कुविवि के प्रो. पीसी तिवारी व डा. भगवती जोशी ने भी हिस्सा लिया।
विज्ञापन


भारत, भूटान और रूस में संचालित होगी यह परियोजना
परियोजना में सामाजिक संस्था चिया और कुविवि भी शामिल
जर्मनी में आयोजित कार्यशाला से लौटे चिया के अधिशासी निदेशक डा. तिवारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें