दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया की अगुवाई में विभिन्न संगठनों के दो दिवसीय संयुक्त अधिवेशन का रविवार को समापन हो गया। वक्ताओं ने भारतीय संविधान और उससे जुड़े मुद्दों पर व्याख्यान दिए। भारतीय बौद्ध महासभा उत्तराखंड, भारतीय लोकतांत्रिक राष्ट्रवादी परिषद, रिपब्लिकन पीपुल्स फ्रंट, इंसाफ, डेमोक्रेटिक राइजिंग इम्पलाइज फाउंडेशन, डॉ. अम्बेडकर मिशन एवं फाउंडेशन के सदस्यों के बीच वक्ताओं ने बौद्ध धर्म के सिद्वांतों को कट्टरवाद और अतिवादी सोच का जवाब बताया।
सत्र का प्रारंभ नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश, जिला पंचायत अध्यक्ष सुमित्रा प्रसाद ने दीप जलाकर किया। डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि वर्तमान समय में धार्मिक कट्टरता का माहौल बनाया जा रहा है, ऐसे में बौद्ध धर्म समाज को नई राह दिखा रहा है। दूसरे सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि बौद्ध धर्म एक जीवन दर्शन है जो तर्क पर खड़ा है और जीने का ढंग सिखाता है। संचालन संजय बघरवाल ने किया। इस मौके पर सुमित हृदयेश, आनंद रावत, आरएस कुटियाल, हरीश आर्या, हुकम सिंह कुंवर, विजय सिजवाली, प्रयाग भट्ट, खजान गुड्डू, मंजू तिवारी, जीआर टम्टा, जेसी बेरी, महेश मुरारी आदि रहे।