हल्द्वानी। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व नेता प्रतिपक्ष एक बार फिर आमने- सामने है। पहले वह सदन में भिड़ चुके हैं, पर सियासत और नियति ऐसी है कि अब दोनों सड़क पर भिड़ेंगे। 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों ने ही हार का मुंह देखा। अजय भट्ट पार्टी अध्यक्ष और हरीश रावत कांग्रेस संगठन से जुड़े रहने के कारण अतिरिक्त दबाव का सामना भी इस चुनाव में करेंगे।
प्रदेश में 2012 से 2017 तक कांग्रेस की सरकार थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट सदन में एक- दूसरे के साथ खूब भिड़े थे। 2017 में विधानसभा चुनाव हुए तो यह दोनों धुरंधर चुनाव ही नहीं जीत सके। अब एक बार फिर दोनों नैनीताल- ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट पर एक-दूसरे के सामने हैं।
खास बात यह भी है कि दोनों ही नेताओं को एक ही तरह के दबाव का सामना भी करना पड़ेगा। अजय भट्ट पार्टी प्रत्याशी होने के साथ ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में अपनी सीट के अलावा अन्य सीटों के गुणा भाग में भी उन्हें उलझना होगा। ऐसे में अपनी सीट पर फोकस करने में उन्हें परेशानी हो सकती है। ठीक यही हाल हरीश रावत का भी है। हरीश रावत इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैें। खुद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह कह रहे हैं कि हरीश रावत के सहयोग से ही चुनाव लड़ा जाएगा। ऐसे में हरीश रावत को भी अपनी सीट के अलावा अन्य सीटों पर भी सक्रिय रहना होगा।
पहले सदन में भिड़े, अब सड़क पर भिड़ेंगे
चुनाव में दोनों ही कर रहे हैं एक जैसे दबाव का सामना
अपनी सीट के अलावा अन्य सीटों पर सक्रिय रहने का भी है दबाव
स्टार प्रचारक उतरेंगे
हल्द्वानी। इस सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा ने ताकत झोंकी हुई है। मुख्यमंत्री जनसभा कर चुके हैं। 28 को प्रधानमंत्री कर रैली है। कांग्रेस की तरफ से भी प्रियंका गांधी की जनसभा और रोड शो होने की चर्चा है।