नैनीताल। हाईकोर्ट ने एनआईईपीवीडी(पूर्व में एनआईवीएच) देहरादून में यौन शोषण के मामले में केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय के सचिव को संस्थान की सुरक्षा और बेहतरी के लिए पांच फरवरी से पूर्व विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी) चौकी प्रभारी आशा आरती की ओर से कोर्ट में पेश की गई गोपनीय जांच रिपोर्ट का संज्ञान लेकर यह आदेश जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संस्थान के पूर्व निदेशक केवीएस राव की जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की जाए। कोर्ट ने न्यायमित्र ललित बेलवाल और अमर शुक्ला को संस्थान की सुरक्षा के संदर्भ में अपने सुझाव शपथपत्र के साथ पेश करने को कहा है।
एनआईईपीवीडी में यौन शोषण मामले का स्वत: संज्ञान लेकर एक जनहित याचिका के रूप में हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है। पूर्व में कोर्ट ने एनआईईपीवीडी चौकी प्रभारी आशा आरती को संस्थान की समस्त जांच कर सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिए थे। पूछा था कि बच्चों की बेहतरी के लिए और क्या कदम उठाए जा सकते हैं। आशा आरती ने बुधवार को गोपनीय रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। अगली सुनवाई पांच फरवरी को होगी। गौरतलब है कि एनआईईपीवीडी में एक शिक्षक पर छात्रा के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे थे। इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी शिक्षक सुचित नारंग जेल में है। पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट इसे जनहित याचिका के तौर पर लेकर चल रहा है।
सामाजिक न्याय मंत्रालय के सचिव को पांच फरवरी तक पेश करनी है रिपोर्ट
-चौकी प्रभारी आशा आरती की ओर से सीलबंद रिपोर्ट कोर्ट में पेश
-न्यायमित्रों से भी कोर्ट ने संस्थान की बेहतरी के लिए सुझाव मांगे
-पूर्व निदेशक केवीएस राव की जांच रिपोर्ट को पेश करने का आदेश