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भयावह हुआ एड्स का दानव

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हल्द्वानी। एड्स का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दस साल के भीतर एचआईवी संक्रमण से 1,038 लोगों की जान जा चुकी है। तमाम प्रभावी कार्यक्रम एवं जागरूकता के बाद भी कुछ पर्वतीय जिले को छोड़कर एचआईवी पाजिटिव रोगियों के मिलने का सिलसिला जारी है। वर्ष 2016-17 में राज्य के 13 जिलों में 817 और वर्ष 2017-18 में अप्रैल से अक्तूबर तक 580 मरीज सामने आ चुके हैं।
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एचआईवी/एड्स की रोकथाम के लिए उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी की ओर से कई कार्यक्रम चलाए जा रहे है। भारत सरकार के निर्देश के अनुसार इसे एक बीमारी के तौर पर लिया जा रहा है। एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूक किया जा रहा है। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में एचआईवी पाजिटिव के रोगी सबसे अधिक सामने आए हैं। राहत की बात ये है कि कुछ पर्वतीय जिलों में मरीजों की संख्या घटी है।

ये है हाल

जिले 2010-11 2011-12 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 17-18
अल्मोड़ा 13 21 27 32 09 27 18 15
बागेश्वर 19 31 32 04 12 09 09 04
चमोली 11 17 14 15 16 03 07 04
चंपावत 11 14 16 13 14 10 15 04
देहरादून 328 330 367 374 358 366 367 265
हरिद्वार 59 76 73 87 93 85 139 101
नैनीताल 164 150 171 161 160 110 120 91
पौड़ी गढ़वाल 46 52 62 37 49 39 19 23
पिथौरागढ़ 28 24 20 18 36 44 25 16
रुद्रप्रयाग 20 28 19 16 09 20 6 00
टिहरी गढ़वाल 08 10 13 08 15 05 13 07
ऊधमसिंह नगर 53 78 71 93 78 80 74 47
उत्तरकाशी 03 08 04 07 09 06 05 03
योग :: 763 839 889 865 858 804 817 580
------------------
वर्ष उपचारित व्यक्ति
2010-11 15,456
2011-12 17,898
2012-13 28,130
2013-14 22,455
2014-15 24,297
2015-16 26,110
2016-17 31,389
2017-18 20,254
......................
नोट = 2017-18 का आंकड़ा अप्रैल से अक्तूबर तक का है।
कोट
मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा कम हैं। भारत सरकार का उद्देश्य है कि लोगों की जांच कराकर रोगियों को पता लगाया जाए और मुख्य धारा में लाकर उन्हें दवाएं उपलब्ध कराई जाएं। लोगों की जांच करके दवाएं दी जा रही हैं। टीमों को स्कूल में भेजकर जागरूक करने का काम किया जा रहा है। लोगों में जागरूकता भी काफी आई है।
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डॉ. विनोद टोलिया, अपर परियोजना निदेशक, एड्स कंट्रोल सोसायटी, उत्तराखंड
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