हल्द्वानी। उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत छात्र संघ के चुनाव में इस कदर डूबे कि एनएसयूआई प्रत्याशी मीमांशा का नामांकन खारिज न होने पर एमबीपीजी कालेज के प्राचार्य पर बिफर पड़े। मंत्री तो यहां तक चाह रहे थे कि एनएसयूआई प्रत्याशी का नामांकन निरस्त नहीं होता तो चुनाव ही निरस्त कर दिया जाए। हद यह रही कि धन सिंह रावत इसके बाद एबीवीपी कार्यालय भी पहुंचे। यही उच्च शिक्षा मंत्री हैं जो उच्च शिक्षण संस्थाओं में अनुशासन का पाठ पढ़ाते नहीं थकते।
शनिवार को उच्चशिक्षा मंत्री डा. धनसिंह रावत गोलापार स्थित उच्चशिक्षा निदेशालय में शौर्य दीवार का लोकार्पण करने आए थे। इस कार्यक्रम के उपरांत निदेशालय के सभागार में विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक शुरू होने से पहले ही एमबीपीजी कालेज छात्रसंघ चुनाव का प्रकरण शुरू हो गया। धन सिंह रावत बैठक में एमबीपीजी कालेज के प्राचार्य डा. जगदीश प्रसाद को देखते ही बिफर पड़े। उन्होंने प्राचार्य से सीधे पूछा कि छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई की अध्यक्ष पद प्रत्याशी मीमांशा आर्या का नामांकन खारिज क्यों नहीं किया गया जब इस बात की पुष्टि हो गई थी कि प्रत्याशी ने बीएससी प्रथम वर्ष में फेल होने के बाद दोबारा उसी कक्षा में झूठे शपथपत्र के आधार पर दाखिला लिया है। प्राचार्य ने मंत्री को बताया कि यह तीन वर्ष पुराना मामला है तथा उसे डिग्री भी जारी हो चुकी है। लिंगदोह समिति के नियमों के तहत प्रत्याशी की जो अर्हता होनी चाहिए, उसमें कोई कमी नही है तथा विधिक राय लेने के बाद ही एनएसयूआई प्रत्याशी मीमांशा आर्या का नामांकन खारिज नहीं किया गया।
प्राचार्य की इन सब बातों को उच्चशिक्षा मंत्री डा. रावत सुनने को ही तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि ऐसे अपराध में तो जेल भेजा जाना चाहिए। मंत्री ने कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए और प्राचार्य को तत्काल महाविद्यालय जाकर इस मामले में दो घंटे में कार्रवाई कर सूचना देने की हिदायत देकर वापस भेज दिया। इस विवाद के दौरान दौरान उच्चशिक्षा मंत्री के सामने यह प्रस्ताव भी रखा गया कि उच्चशिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक डा. अनुराग अग्रवाल और उपनिदेशक डा. ललित प्रभा शर्मा की एक जांच समिति बना दी जाए, लेकिन छात्रसंघ चुनाव में निदेशालय स्तर से कोई कार्रवाई का अधिकार न होने के आधार पर इसे खारिज कर दिया गया। बाद में मंत्री ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति को भी फोन कर पूछा कि डिग्री कैसे दे दी गई।
बैठक के बाद उच्च शिक्षा मंत्री के गुस्से का पारा ठंडा हो गया तो यह बयान दिया कि इस मामले में उन्हें शनिवार को नैनीताल में कई छात्रों की ओर से ज्ञापन दिया गया था। इस पर उन्होंने प्राचार्य को यह निर्देश दिए हैं कि एनएसयूआई प्रत्याशी के खिलाफ आईं शिकायतों का निस्तारण कर नियमों के तहत शीघ्र कार्रवाई की जाए।
उच्चशिक्षा मंत्री के निर्देश पर एनएसयूआई प्रत्याशी मीमांशा आर्या के दाखिले को लेकर आईं शिकायतों का मामला शिकायत निवारण प्रकोष्ठ को सौंप दिया गया है। शिकायत निवारण प्रकोष्ठ शिकायतकर्ताओं और प्रत्याशी मीमांशा आर्या दोनों पक्षों को बुलाकर पक्ष सुनेगा तथा तथ्यों के आधार पर फैसला लेगा। प्रवेश निरस्त करने के बारे में शिकायत निवारण समिति ही फैसला करेगी तथा डिग्री निरस्त करने के बारे में विश्वविद्यालय द्वारा निर्णय लिया जाएगा। कालेज स्तर से विश्वविद्यालय को कार्रवाई से जल्द अवगत करा दिया जाएगा। - डॉ. जगदीश प्रसाद, प्राचार्य एमबीपीजी कालेज हल्द्वानी