नैनीताल। उच्च न्यायालय ने ग्राम विकास अधिकारियों के 196 पदों पर भर्ती निरस्त करने के सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए करीब 87 हजार अभ्यर्थियों की परीक्षा दोबारा कराने के निर्देश सरकार को दिए हैं।
रामनगर (जिला नैनीताल) निवासी आलिया, ऊधमसिंह नगर निवासी बलदेव सिंह, काशीपुर निवासी सुधांशु चौहान सहित अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि 20 नवंबर 2015 को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से ग्राम विकास अधिकारियों के 196 पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। छह मार्च 2016 को लिखित परीक्षा हुई और 29 मार्च को परिणाम घोषित किया गया। परिणाम के खिलाफ सात अप्रैल 2016 को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में कुछ लोगों की ओर से शिकायत की गई। इस शिकायत का संज्ञान लेकर की गई जांच में पाया गया कि परिणाम में कोई गड़बड़ी नहीं है। इसके बाद 16 से 19 मई के बीच चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों कि जांच हुई।
इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर सरकार ने 23 मई को दोबारा जांच के आदेश दे दिए। इसी के खिलाफ पूर्व में कुछ लोगों की ओर से याचिका दायर की गई थी। न्यायालय ने पांच अप्रैल 2017 को याचिका निस्तारित करते हुए कहा था कि अगर जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई जाती है तो इन्हें नियुक्ति दें। सरकार ने नियुक्ति देने की जगह चयन ही निरस्त कर दिया। चयन निरस्त किए जाने के खिलाफ ही आलिया सहित अन्य ने याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को दोबारा परीक्षा कराने के आदेश दिए।