नैनीताल। उच्च न्यायालय में दस हजार करोड़ सालाना वाणिज्य कर चोरी का मामला उच्च न्यायालय पहुंचा है। इस प्रकरण पर सुनवाई दीपावली के बाद होगी। याचिकाकर्ता ने कर चोरी मामले की सीबीआई या आयकर से जांच कराने के साथ ही आरोपित अफसरों की बेनामी संपत्ति की भी जांच कराने का अनुरोध किया है।
रुड़की (जिला हरिद्वार) निवासी धमेंद्र सिंह ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा कि वाणिज्य कर विभाग (अब परिवर्तित नाम राज्य कर विभाग) के बडे़ अधिकारियों की ओर से बडे़ व्यापारियों के साथ मिलीभगत कर लगभग दस हजार करोड़ रुपये सालाना टैक्स चोरी कर उत्तराखंड सरकार को चपत लगाई जा रही है। याचिका में राज्य कर विभाग के 35 अधिकारियों सचिव वित्त अमित नेगी, अपर सचिव वित्त बीबी मठपाल, कर आयुक्त पीयूष कुमार, संयुक्त आयुक्त नवीन चंद्र जोशी व राकेश वर्मा, संयुक्त आयुक्त वीएस नगन्याल, उप आयुक्त देहरादून यशपाल सिंह, उपायुक्त किच्छा (रुद्रपुर) शिवेंद्र प्रताप सिंह, उपायुक्त ऋषिकेश संजीव सिंह सोलंकी, उपायुक्त पीपी शुक्ला, अनुराग मिश्रा, धर्मेंद्र राज चौहान सहित कई अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में मांग की गई है कि उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर इस प्रकरण की जांच सीबीआई या आयकर विभाग से कराई जाए। इन अधिकारियों की बेनामी संपत्तियों की जांच कराने की मांग भी की गई है।