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शहीद की शहादत को दो साल में ही भूल गए

Mon, 04 Sep 2017 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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लांसनायक मोहन नाथ गोस्वामी - फोटो : amar ujala
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शहीद लांसनायक मोहन नाथ गोस्वामी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। दो सितंबर 2015 को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में हापरुदा जंगल में छिपे लश्कर के 10 आतंकवादियों से 11 दिन तक लोहा लेकर अपनी जान देश के लिए न्यौछावर करने पर उन्हें बहादुरी का सर्वोच्च सम्मान अशोक चक्र दिया गया था।
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जब वे शहीद हुए तब सरकार ने बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थी। परिवार के सदस्य को नौकरी, बिंदुखत्ता में स्टेडियम बनाने, जनता हाइस्कूल का नाम शहीद मोहन नाथ गोस्वामी के नाम पर रखा रखने का ऐलान किया गया था। दो साल में सभी घोषणाएं हवा हवाई रहीं।

शहीद की पत्नी भावना का कहना है कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाले नेता गायब हो गए हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए, इससे सैनिक परिवारों का मनोबल टूटता है।

शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की पत्नी भावना ने कहा कि वादे अधूरे हैं। हां, शहीद मोहन नाथ गोस्वामी के नाम पर शहीद द्वार बनाया गया है, जिसकी हालत भी खस्ता हो चुकी है। भावना ने कहा कि शहीदों के नाम पर इस प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
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भले ही सभी आश्वासन पूरे न होते हों लेकिन शहीद के नाम पर तो कम से कम ऐसा नहीं होना चाहिए। भावना ने कहा कि अब किसी भी प्रकार की उम्मीद छोड़ दी है। उन्हें सेना के अफसरों पर भरोसा है क्योंकि एक सैनिक ही सैनिक के दर्द को समझ सकता है इसलिए यदि उन्हें अपना दुखड़ा सुनाना भी होगा तो वह सेना के अफसरों से ही कहेंगी।

समाधि पर विधायक ने पुष्प अर्पित किए

अशोक चक्र विजेता शहीद मोहन नाथ गोस्वामी के शहीदी दिवस पर विधायक नवीन दुम्का समेत तमाम गणमान्य लोगों ने उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित किए। विधायक नवीन दुम्का ने कहा कि शहीद मोहन नाथ गोस्वामी का बलिदान हमेशा हमेशा याद किया जाएगा। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक आदर्श साबित होगा।
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