रामनगर (नैनीताल)। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) को बाघों की राजधानी कहा जाता है। लंबे इंतजार के बाद विश्व बाघ दिवस पर सीटीआर में की गई बाघों की गणना के नतीजे 29 जुलाई को घोषित किए जाएंगे। इस गणना के दौरान क्षेत्र में कई बाघों की मौत भी हुई है, जिससे पार्क प्रशासन के गणित में अंतर आ सकता है। इसके बावजूद सीटीआर प्रशासन ने बाघों की संख्या में बढ़ोतरी होना बताया है।
सीटीआर क्षेत्र में नवंबर 2016 से फरवरी 2017 तक बाघों की गणना की गई। इसके लिए कार्बेट नेशनल पार्क के क्षेत्र में नवंबर, दिसंबर दो माह तक 500 कैमरा ट्रैप लगाए गए थे। इसके बाद जनवरी, फरवरी में कालागढ़ डिवीजन में भी 500 कैमरा ट्रैप की मदद से गणना की गई। सीटीआर के उपनिदेशक अमित वर्मा ने बताया कि इन चार माह में एक हजार से अधिक कैमरों में विभिन्न वन्यजीवों की सवा चार लाख फोटो कैद हुईं। इनमें बाघों की फोटो 3800 थीं। इनका मिलान किया गया है। बाघ गणना के नतीजों की घोषणा 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस के अवसर पर की जाएगी। वर्तमान में सीटीआर में 163 बाघ दर्ज हैं। हालांकि गणना के दौरान कई बाघों की मौत भी हो गई है, जिससे सीटीआर प्रशासन के आंकड़ों में अंतर भी आ सकता है। हालांकि सीटीआर के निदेशक सुरेंद्र मेहरा ने बताया कि बाघों की मौत से गणना में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। हमारे लिए वन्यजीवों की मौत का कारण सबसे महत्वपूर्ण होता है। यहां अक्सर आपसी संघर्ष में ही बाघों की स्वाभाविक मौतें होती हैं। इसके साथ ही कैमरा ट्रैप में सभी बाघ कैद भी नहीं हो पाते हैं। मेहरा ने बताया कि यह फेस चार की गणना है। हर दो साल में गणना होती है। इसमें बाघों की संख्या ही बताई जाती है। गणना 2011 से शुरू हुई थी लेकिन ये पूरे क्षेत्र में नहीं हो सकी। 2013 में फेस दो में 149, 2015 में फेस तीन में 163 बाघों की उपस्थिति दर्ज हुई थी, अब 2017 में फेस चार की गणना में बाघों की संख्या बढ़ी है। वैसे अखिल भारतीय बाघ गणना में सीटीआर में बाघों की अनुमानित संख्या 215 बताई गई। बाघ गणना के नतीजों की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री से समय मांगा गया है। इसलिए विश्व बाघ दिवस की पूर्व संध्या पर भी इसकी घोषणा हो सकती है।