हाइकोर्ट ने एएनएम के 440 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर विशेष अर्जी को खारिज करते हुए इन पदों के लिए केवल उन अभ्यर्थिंयों को ही योग्य माना है, जिन्होंने विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट पास किया हो और विभागीय महिला स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्रों से एएनएम का डिप्लोमा प्राप्त किया हो।
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी संतोष चंद्र व अन्य ने हाईकोर्ट में विशेष अर्जी दायर कर एकलपीठ के 11 अप्रैल 2017 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें एएनएम भर्ती सेवा नियमावली- 1997 का पालन करने के निर्देश दिए थे। नियमावली के तहत एएनएम पदों के लिए इंटरमीडिएट विज्ञान वर्ग के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। हालांकि याचिका में दावा किया गया था कि उनका एएनएम डिप्लोमा भारतीय नर्सिंग काउंसिल से मान्य है, इसलिए उन्हें एएनएम के पदों के लिए अयोग्य नहीं माना जा सकता। भले ही उन्होंने इंटरमीडिएट कला वर्ग से उत्तीर्ण क्यों न किया हो।
हाइकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद एकलपीठ के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि एएनएम भर्ती प्रक्रिया सेवा नियमावली-1997 के अनुरूप ही होगी। साथ ही इन पदों के लिए वे ही अभ्यर्थी योग्य होंगे, जिन्होंने विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट पास किया और विभागीय महिला स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्रों से एएनएम का डिप्लोमा प्राप्त किया हो। खंडपीठ ने पंजाब नर्सिंग काउंसिल व अन्य राज्यों से प्राप्त एएनएम डिप्लोमा को चयन प्रक्रिया के लिए वैध नहीं माना है।