हल्द्वानी। ग्लोबल वार्मिंग से सिर्फ हिमालय, मौसम और वनस्पतियां ही प्रभावित नहीं हुई हैं, इसका असर सरकारी खजाने पर भी दिखने लगा है। बारिश नहीं होने से नैनीताल-ऊधम सिंह नगर की ‘जीवन और धन’ दायिनी गौला में भरपूर खनिज नहीं आया है। सरकार को इस साल 1 अरब 17 करोड़ से ज्यादा राजस्व का नुकसान होने की अंदेशा है।
कुमाऊं में खनन आय का प्रमुख स्रोत है, इसमें गौला नदी एक महत्वपूर्ण स्रोत मानी जाती है। नदी के 1475 हेक्टेयर भूमि से 54.25 लाख घनमीटर उपखनिज की निकासी का लक्ष्य है। यदि वन निगम निर्धारित लक्ष्य के बराबर उपखनिज निकासी करता है तब सरकार को 2,61,97, 32,500 रुपये की आय होती। इधर पहाड़ों में इस साल बारिश खासकर नदी के उद्गम स्थल बेतालघाट इलाके में कम हुई है। भरपूर बारिश नहीं होने से नदी में भरपूर मात्रा में उप खनिज नहीं पहुंचा है। वन, वन निगम अधिकारी, वाहन स्वामियों की माने तो नदी में सिर्फ 20-25 लाख घन मीटर उप खनिज पहुंचा है। वैसे नदी में उपखनिज की मात्रा का आकलन केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान सर्वे के बाद करता है, यह सर्वे होना बाकी है। अगर वन निगम खींचतान कर अधिकतम 30 लाख घनमीटर उप खनिज निकासी भी करता है तब महज 1,44,87,00,000 रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। फिर भी निर्धारित लक्ष्य की आय से 1,17,10,32,500 रुपये का घाटा होने की आशंका है।
इस बार गौला से झोली रहेगी ढीली
उप खनिज की मात्रा कम, राज्य सरकार एक अरब से ज्यादा का लगेगा झटका
1457 हेक्टेयर में होता है खनन,7450 वाहन है पंजीकृत
11 गेटों से होती है निकासी, 1,000 करोड़ है कुल अर्थव्यवस्था
तीन सालों में गौला से हुई आय
साल निकासी घनमीटर में आय
2015-16 4435879.7950 1,64,81,14,925
2016-17 3746613.5006 1,69,87,23,789
2017-18 4012836.9866 1,99,88,82,550
अभी तक मिले 12.98 करोड़
हल्द्वानी। वन निगम के आंकड़ों पर गौर करें तो अभी तक 2,60,875.13 घनमीटर उप खनिज की निकासी हुई है अभी तक 12,98,72,269 रुपये की आय हुई है।
महंगा हो जाएगा घर बनाना
हल्द्वानी। नदी में उप खनिज कम आने से घर बनाना भी महंगा हो जाएगा। निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोत्तरी होने की अनुमान है। अभी भी 10-15 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। लालकुआं स्टोन क्रेशर के अनुसार चिनाई का रेता 125-135 रुपये प्रति क्विंटल, बजरी 120-130 रुपये प्रति क्विंटल, प्लास्टर का रेता 120-135 रुपये प्रति क्विंटल तक है। जबकि गौला नदी में खनन शुरू होने पर यही माल 100-120 रुपये प्रति क्विंटल तक हो जाया करता था।
वाहन स्वामियों को कम मिलेंगे फेरे
हल्द्वानी। नदी में माल कम होने से सिर्फ सरकार का खजाना ही नहीं घटेगा बल्कि इसका असर नदी में उपखनिज निकासी को पंजीकृत वाहनों पर भी होगा। वाहन से अधिकतम 90 क्विंटल माल ले जा सकता है। यदि 54.25 लाख घनमीटर उपखनिज निकासी होती है तब एक वाहन को 170-180 फेरे मिलेंगे। वहीं माल कम होने से ये फेरे भी घटकर 80-90 ही रह जाएंगे जिससे उनकी आय भी प्रभावित होगी।
नदी पहले बंद हुई तो मजदूरों की दिहाड़ी पर भी संकट
हल्द्वानी। गौला नदी में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 50 हजार से ज्यादा मजदूर जुड़े रहते हैं। इन मजदूरों को 300-400 रुपये दिहाड़ी मिलती है। यदि नदी समय से पूर्व बंद होती है तब इन मजदूरों की दिहाड़ी पर भी संकट हो सकता है।
सद्भाव को मिलेगा 9 लाख घनमीटर माल
हल्द्वानी। एनएच-87 की निर्माणदायी कंपनी सद्भाव को गौला पार में राजपुरा प्रथम गेट दिया है। इस गेट से नौ लाख घनमीटर माल निकलता है तब वन निगम को आय प्राप्त होगी। लेकिन वाहन स्वामियों के फेरे घट सकते हैं।
नदी में अभी उप खनिज का सर्वे नहीं हो पाया है। वन निगम नदी से अधिकतम 54.25 लाख घनमीटर उप खनिज निकासी का लक्ष्य पूरा करने की कोशिश करेगा।
-एमपीएस रावत, वन निगम क्षेत्रीय प्रबंधक