हल्द्वानी। आईएसबीटी को लेकर असली पेच वन भूमि को लेकर फंसेगा। परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में दून में हुई बैठक में यह मुद्दा भी उठा था।
आईएसबीटी के लिए पूर्व में गौलापार में आठ हेक्टेयर वन भूमि मिल चुकी है। अब तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अधीन तीनपानी के जंगल में नये सिरे से आईएसबीटी के लिए 10 हेक्टेयर वन भूमि लेने की योजना है। पर जो गौलापार में वन भूमि पूर्व में परिवहन विभाग को हस्तांतरित हो चुकी है? उसका क्या होगा। यह बड़ा सवाल है। एक ही परियोजना के लिए दो बार वन भूमि मिलेगी? इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। सूत्रों के अनुसार बैठक में शामिल एक डीएफओ से भी इस मामले पर बातचीत हुई है, तो उन्होंने नियमों और स्थितियों को देखने के बाद कोई जानकारी देने की बात कही थी। इसमें पूर्व में दी गई वन भूमि की शर्तों (गौलापार) में बदलाव को लेकर कोई रास्ता तलाशने में अधिकारी लगे हैं।
आईएसबीटी के लिए बनेगी एक और नई सड़क
तीनपानी पर प्रस्तावित आईएसबीटी बनने से रामपुर रोड और देवलचौड़ पर वाहनों दबाव बढ़ने और जाम की समस्या हो सकती है। इसके मद्देनजर भविष्य में पंचायतघर (रामपुर रोड) से हैड़ागज्जर होते हुए एक साढ़े तीन किमी का वैकल्पिक रास्ता आईएसबीटी तक बनाने की योजना भी बनी है। इसके लिए वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव भी बनाया जाएगा।
क्यों खारिज हुए दो अन्य प्रस्ताव
- एफटीआई भूमि पर पेड़ों की संख्या ज्यादा होने और केवल पांच हेक्टेयर वन भूमि होने के कारण प्रस्ताव को खारिज किया गया।
- आईएसबीटी के लिए नोवा फैक्ट्री के अधिग्रहण में काफी रकम खर्च होती। ऐसे में प्रस्ताव का रद्द कर दिया गया।
- ट्रांसपोर्ट नगर से तीनपानी बरेली रोड तक दो किमी नहर कवरिंग करने के साथ सड़क चौड़ी करने पर करीब 22 करोड़ का प्रस्ताव बनाया गया है। बैठक में प्रस्ताव पर कोई चर्चा तक नहीं हुई है।
कब क्या हुआ-
- 27 दिसंबर 2017 को कैबिनेट ने गौलापार में बन रहे आईएसबीटी में रोक लगाई।
- 31 दिसंबर 2017 को हल्द्वानी आए मुख्यमंत्री, हल्द्वानी में ही आईएसबीटी बनाने की घोषणा।
- 10 जनवरी 2018 में नेता प्रतिपक्ष ने रखी प्रेस वार्ता, 30 जनवरी को भूख हड़ताल में बैठने की दी चेतावनी।
- नेता प्रतिपक्ष की भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद हरकत में आई सरकार, जमीन चयन के लिए कमेटी का किया गठन।
- 27 जनवरी 2018 को परिवहन सचिव डी सैंथिल पंडियन ने मुक्त विवि के पास जमीन का किया निरीक्षण।
- 29 जनवरी 2018 को भाजपा कार्यकर्ताओं ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पास स्थित जमीन को आईएसबीटी के लिए उपयुक्त बताया और मुक्त विवि के पास कार्यक्रम कर मिठाई बांटी।
- 30 जनवरी को कांग्रेस ने आईएसबीटी में एक दिवसीय उपवास रखा।
- शासन ने 08 फरवरी 2018 को दोबारा जमीन चयन के लिए कमेटी का गठन किया।
- 10 फरवरी 2018 को टीम ने नोवा स्टील, एफटीआई और मुक्त विवि के पास जमीन का निरीक्षण किया।
- 16 मार्च 2018 को टीम ने शासन को तीनों जमीन की रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में यूओयू के पास जमीन को उपयुक्त बताया।
- 20 मई को दोबारा परिवहन मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी की बैठक। बैठक में डीएम को दोबारा जमीन चयन करने और यूओयू तक सड़क बनाने का प्रस्ताव मांगा।
- 27 मई 2018 को एसडीएम की अध्यक्षता में लोनिवि, सिंचाई, बिजली विभाग के अधिकारियों ने यूओयू के पास की जमीन का निरीक्षण कर, सड़क बनाने के लिए प्रस्ताव बनाया।
- 12 जुलाई 2018 को 22.68 करोड़ का एस्टीमेट शासन को भेजा था।
मामला हाईकोर्ट में तो सरकार कैसे ले सकती है फैसला-जोशी
हल्द्वानी। हाईकोर्ट में आईएसबीटी को लेकर फरवरी 2018 में पीआईएल दाखिल करने वाले रवि शंकर जोशी ने कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। सरकार की ओर से जो हलफनामा जो दायर किया है, उसमें गौलापार मामले में करीब तीन करोड़ खर्च की बात कही है। उधर विधानसभा में जब विपक्ष ने मामला उठाया था तो उस समय सरकार ने कहा था कि मामला कोर्ट में है, हम इस मामले में कुछ नहीं कह सकते हैं। तो अब सरकार ने किस आधार पर एकतरफा निर्णय ले लिया। ये न्यायालय की अवमानना है, अगली सुनवाई में मैं इस मामले को कोर्ट में उठाऊंगा।