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टार्च और लाठियों के सहारे जंगलों में गुजर रही ग्रामीणों की रात

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। हाथों में टार्च, लाठियां और चोर-चोर, पकड़ो-पकड़ो का शोरगुल, जी हां पिछले एक पखवाड़े से कुछ इस तरह से कट रही है ग्रामीणों की रात। दरअसल चोरी की बढ़ती वारदातों ने ग्रामीणों को हिलाकर रख दिया है। तंत्र की नाकामी के बाद अब ग्रामीण रतजगा कर चोरों पर निगाह रख रहे हैं। संदिग्ध लोग दिखते ही ग्रामीण झुंड में एकत्रित होकर जंगलों की कांबिंग पर निकल पड़ते हैं। बधाण के बाद सोमवार की रात अम्याड़ी और इससे लगे गांवों के ग्रामीणों की रात भी संदिग्धों को ढूंढने में कटी, लेकिन सफलता नहीं मिली।
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मालूम हो कि रानीखेत क्षेत्र से लगे गांवों में सिलसिलेवार चोरियों ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। मंगचौड़ा, चौकुनी, कलौना, बनोलिया, ख्यूशालकोट, टाना तस्वाड़, बधाण सहित तमाम स्थानों पर चोरों ने घरों के ताले तोड़कर नकदी और लाखों के जेवरात पार कर लिए, लेकिन राजस्व पुलिस अभी तक चोरियों का खुलासा नहीं कर पाई है। इधर चोरी की घटनाओं से भयभीत ग्रामीण अब रतजगा करने को विवश हैं।

रात्रि में टार्च और लाठियां पकड़ ग्रामीण शोरगुल करते हुए जंगलों में कांबिग कर रहे हैं। सोमवार की रात अम्याड़ी में कुछ संदिग्ध लोग दिखने से वहां हड़कंप मंच गया। ग्रामीण लता पांडेय ने बताया कि रात में वह खाना खाकर जैसे ही बाहर निकली तो भवन के पीछे गली में पांच संदिग्ध लोग दिखाई दिए।
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उन्होंने शोरगुल मचाना शुरू कर दिया। जिस पर डींगा, गुलोली, कोटली, गवड़ा, पल्यूड़ा के ग्रामीण वहां एकत्रित हो गए और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश चंद्र पांडे के साथ पूरी रात ग्रामीणों ने जंगलों में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन वह संदिग्ध लोग अंधेरे और घनघोर जंगल का फायदा उठाकर वहां से भाग निकले। रात्रि में वहां पुलिस की गश्ती टीम भी गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से चोरी की घटनाओं से निजात दिलाने की मांग की है।
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