हल्द्वानी। उच्चशिक्षा निदेशालय ने राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को ‘प्राचार्य एवं प्रोफेसर’ पद नाम देने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस प्रक्रिया में यूजीसी के नियमों की अनदेखी किए जाने से निदेशालय के अधिकारी सवालों के घेरे में हैं। इतना ही नहीं उच्चशिक्षा निदेशालय ने इस आदेश को जारी करने में कांग्रेस शासनकाल में वर्ष 2016 में जारी हुए एक जीओ का सहारा लिया है।
उच्चशिक्षा निदेशालय दफ्तर में वर्तमान में डिग्री कॉलेजों में कार्यरत एसोसिएट प्रोफे सरों को ‘प्रोफे सर’ पद नाम देने के लिए आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग की जा रही है। निदेशालय द्वारा इसके लिए यूजीसी के नियमों का हवाला दिया है। वहीं, दूसरी ओर प्रभारी निदेशक डॉ. सविता मोहन ने प्रदेश में अव्यवस्थित राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को ‘प्राचार्य एवं प्रोफेसर’ पद नाम प्रदान किए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो ‘प्रोफेसर’ पद नाम देने के लिए यूजीसी के कुछ नियम कायदे हैं, जिनका पालन हीं नहीं किया गया। यूजीसी द्वारा प्रोफे सर पद नाम के लिए न्यूनतम अर्हता पीएचडी निर्धारित की गई है। यहां तक कि प्राचार्य के लिए भी न्यूनतम अर्हता पीएचडी निर्धारित है। परंतु उच्चशिक्षा विभाग द्वारा यूजीसी के नियमों को ताख पर रखकर बिना न्यूनतम अर्हता जांचे, मात्र वरिष्ठता के आधार पर प्राध्यापकों को प्राचार्य पद पर प्रोन्नत किया जा रहा है। यही नहीं अब उन्हें प्रोफे सर पद नाम भी दे दिया गया है। बताते हैं कि ‘प्राचार्य एवं प्रोफेसर’ पद नाम से नवाजे गए तीन प्राचार्य तो पीएचडी तक नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि बिना पीएचडी प्राचार्य नियमों की अनदेखी से प्रोफे सर तो बन गए परंतु ऐसे प्राचार्य विगत वर्षों का एरियर पाने के लिए आवेदन नहीं कर सकते क्योंकि वे प्रोफे सर पद के लिए न्यूनतम योग्यता नहीं रखते। साथ ही उच्चशिक्षा निदेशालय द्वारा एसोसिएट प्रोफे सरों से प्रोफेसर पद नाम के लिए मांगे गए आवेदन भी अलग अलग प्रकार के उपलब्ध कराए हैं। जहां एक ओर प्राचार्यों को बिना आवेदन के ही प्रोफेसर बना दिया गया है वहीं दूसरी ओर निदेशालय में कार्यरत प्राध्यापकों को एपीआई से छूट दी गई है। तीसरी ओर कुछ प्राध्यापकों को 2001 के यूजीसी नियमों का हवाला देते हुए चार प्रपत्रों का आवेदन भरवाया जा रहा है तो कुछ प्राध्यापकों से 27 पन्नों की एपीआई भरने को कहा गया है। इसी के चलते निदेशालय में प्रोफेसर पद नाम देने की चल रही प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान लग गया है। इधर, प्रभारी निदेशक डॉ. सविता मोहन से कई बार मोबाइल फोन पर बात करने की कोशिश की गई मगर उनसे बात नहीं हो सकी।
उच्चशिक्षा निदेशालय ने आनन-फानन में जारी किया आदेश
बिना पीएचडी प्राचार्यों को ‘प्रोफेसर’ पद नाम देने पर उठे सवाल