भवाली (नैनीताल)। बच्चों की कहानियां, कविताओं तक ही बाल साहित्य सीमित रहता है, लेकिन लक्ष्मी खन्ना (सुमन) के लिए बाल साहित्य का मतलब बच्चों के लिए गजलें, पहेलियां, उपन्यास, दोहे, नुक्कड़ आदि विधाओं से है। बाल साहित्य में कई पुस्तकें लिख चुके सुमन की दो नई किताबें छपी हैं। इनके नाम ‘नन्ही मुन्नी बाल गजलें’ एवं ‘मैं भी स्कूल जाऊंगी’ हैं। 1942 में रावलपिंडी (पाकिस्तान) में जन्मे लक्ष्मी खन्ना का परिवार 1947 में नैनीताल आकर बस गया था। कुछ समय तक अध्यापन के बाद सुमन ने खेती शुरू की, लेकिन उनके अंदर साहित्य का संसार भी छिपा था। बाल साहित्य में रुचि रखते हुए उन्होंने 1983-84 में हिंदी कविता लिखना शुरू किया। बाल साहित्य में उनकी पहली पुस्तक 2010 में नेशनल बुक ट्रस्ट ने छापी। बच्चों के लिए पहेलियों पर आधारित उनकी किताब ‘सुनो पहेली, नई पहेली’ काफी चर्चित हुई। इसमें छंद के रूप में 300 पहेलियां छपी हैं। खन्ना के सात बाल उपन्यास, चार बाल कविता संग्रह, एक दोहा, एक नुक्कड़ की किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। बाल साहित्य में उनकी ‘छुटके-मुटके जंगल में’, ‘गधा बत्तीसी’ किताबें काफी लोकप्रिय रहीं। सुमन को बाल साहित्य पर धरोहर स्मृति न्यास बिजनौर से बाल साहित्य सम्मान, मध्यप्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल आदि संस्थाओं से सम्मान मिल चुका है।