नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने लेह लद्दाख में तैनात सैनिक की पत्नी के साथ बलात्कार के दोषी को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने दंड प्रक्रिया संहिता की संशोधित धारा 357 ए के तहत पीड़िता को अर्थदंड से वसूली जाने वाली राशि में से दस हजार रुपये प्रतिकर लेने का भी अधिकार दिया। इसके लिए पीड़िता को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय नैनीताल में आवेदन करना होगा।
गांधीनगर बिंदुखत्ता क्षेत्र में 23 अक्तूबर 2016 की रात राकेश कुनियाल ने पड़ोस में रहने वाली एक महिला के साथ उस वक्त दुराचार किया था जब वह रात में शौच के लिए घर से बाहर निकली थी। महिला की चीख पुकार सुन जब पीड़िता की सास घर से बाहर आई तो आरोपी ने उन्हें घटना के बाबत किसी को भी बताने पर जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता और उसकी सास ने लोकलाज के भय से घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी। एक हफ्ते बाद जब लेह लद्दाख में तैनात पीड़िता का पति छुट्टी पर घर आया तो उसने लालकुआं थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। बाद में आरोपी को न्यायालय से जमानत मिल गई थी। सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने आरोपी के खिलाफ छह गवाह पेश किए थे, जिसके बाद विद्वान न्यायाधीश ने आरोपी को बलात्कार का दोषी ठहराया। बृहस्पतिवार को आरोपी के खिलाफ सजा सुनाते हुए जिला न्यायाधीश ने आरोपी को धारा 376 में आजीवन कारावास, 20 हजार रुपये अर्थदंड, अर्थदंड न देने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास, धारा 506 में दो साल का कारावास, पांच हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। विद्वान न्यायाधीश ने धारा 357 ए, दंड प्रक्रिया संहिता के तहत पीड़िता को अधिकार दिया कि वह इस घटना के संदर्भ में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के कार्यालय में आवेदन पत्र प्रस्तुत कर दस हजार रुपये प्रतिकर ले सकती है। उक्त दस हजार रुपये आरोपी से वसूले जाने वाले अर्थदंड से देय होंगे।