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दीपशिखा ने डिप्टी एसपी बनकर हल् द्वानी का नाम किया रोशन

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हल्द्वानी। उत्तराखंड लोकसेवा आयोग की उत्तराखंड सम्मिलित राज्य सिविल प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2014 में पुलिस उपाधीक्षक पद पर चयनित दीपशिखा अग्रवाल ने प्रदेश में हल्द्वानी का नाम रोशन किया है। दीपशिखा ने पुलिस उपाधीक्षक पद पर सफल 20 अभ्यर्थियों में दसवीं रैंक हासिल की है। दीपशिखा की इस कामयाबी से उनके परिवार में जश्न का माहौल है। वह कहतीं हैं कि उन्हें अपने दादा-दादी और मम्मी-पापा का सपना पूरा करने की बेहद खुशी है।
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नैनीताल रोड स्थित सिविल लाइंस निवासी दीपशिखा अग्रवाल के पिता सुदीप अग्रवाल व्यवसायी हैं। माता स्वाती अग्रवाल गृहणी और छोटी बहन ज्योतिका अग्रवाल, भाई आदित्य अग्रवाल अभी पढ़ाई कर रहे हैं। उनके दादा इंजीनियर अशोक अग्रवाल पीडब्ल्यूडी से रिटायर हैं। दीपशिखा ने प्रारंभिक शिक्षा से लेकर कक्षा दस तक पढ़ाई शहर के नैनीवैली सीनियर सेकेंडरी स्कूल से वर्ष 2005 में पूरी की, इसके बाद वह पढ़ाई करने दिल्ली चली गईं। वर्ष 2007 में 12वीं की पढ़ाई डीपीएस आरकेपुरम दिल्ली से करने के बाद दीपशिखा ने वर्ष 2010 में दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से बीए आनर्स मैथ्स की पढ़ाई की। दीपशिखा कहतीं हैं कि उन्होंने वर्ष 2014 में उत्तराखंड लोकसेवा आयोग की पीसीएस की परीक्षा दी लेकिन इसका परिणाम घोषित होने में तीन वर्ष की अवधि लग गई। रिजल्ट आने में देरी भले हुई मगर पुलिस उपाधीक्षक का पद मिलने से बहुत खुश हैं। वैसे उन्होंने इसी वर्ष हुई पीसीएस की परीक्षा पुन: दी थी और प्री क्वालीफाई भी किया। उनका मानना है कि कोई भी प्रतियोगी परीक्षा हो उसका रिजल्ट जल्द आना चाहिए ताकि अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति न रहे। दीपशिखा ने अपनी कामयाबी का श्रेय दादा-दादी और माता-पिता को देते हुए कहा कि अगर लक्ष्य निर्धारित कर तैयारी की जाए तो मंजिल अवश्य मिलती है।
वह कहतीं हैं कि प्रदेश में जहां भी उन्हें पहली पोस्टिंग मिलेगी वह उस क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करना उनकी प्राथमिकता होगी। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उनकी कोशिश होगी कि पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिल सके। उसके साथ अत्याचार न हो। दीपशिखा को गाने सुनने के अलावा बैडमिंटन खेलने का शौक है। पढ़ाई का तनाव दूर करने के लिए वह मेडीटेशन भी करती थीं।
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नशे को छोड़ अपनी मंजिल तय करें युवा
शहर के युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर दीपशिखा ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि जीवन में अगर कुछ बनकर सम्मान पाना है तो वे नशे को छोड़ कामयाबी के रास्ते को अपनाएं। नशे से उनका जीवन बर्बाद हो जाएगा। अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर ध्यान देने की जरूरत है कि उनके बच्चे कहीं गलत दिशा में तो नहीं जा रहे। छात्र-छात्राओं को लक्ष्य तय कर आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।
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