हल्द्वानी। इस बार लोकसभा चुनावों में मतदाता पूरी तरह शांत और खामोश रहा। मतदाताओं की खामोशी ने राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। तमाम प्रयासों के बावजूद किसी भी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता मतदाताओं की नब्ज नहीं टटोल पाए। मुद्दा विहीन इस चुनाव में प्रत्याशी यह तय नहीं कर पाए हैं कि ऊंट किस करवट बैठेगा।
मतदान को लेकर सुबह से ही भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। पार्टी प्रत्याशी के साथ ही कार्यकर्ता भी पूरे मनोयोग से अपने पक्ष में मतदान कराने का असफल प्रयास करते रहे। इन दोनों प्रमुख दलों ने लगभग सभी बूथों पर बस्ते लगाए थे। मतदाताओं के बस्तों के पास आने और कुछ संकेत मिलने की संभावना इन कार्यकर्ताओं को थी लेकिन किसी भी बूथ पर पार्टी बस्तों की ओर मतदाताओं ने झांका तक नहीं। कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना था कि वह इस बार मतदाताओं का रुख नहीं भांप पाए हैं। हालांकि अलग-अलग समीकरण भिड़ाकर कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता अपनी-अपनी जीत के कयास लगा रहे हैं।
खामोश मतदाताओं की नब्ज नहीं टटोल पाए सियासी दल
अब अपने-अपने समीकरण भिड़ाने में लगे प्रत्याशी और पार्टी कार्यकर्ता