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जमरानी बांध में एक और पेंच

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हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना की फाइनल डीपीआर केंद्रीय जलायोग के सौंप दी गई है लेकिन परियोजना की मंजूरी में पर्यावरणीय आपत्ति का निस्तारण कराने की एक और बाधा है। बांध परियोजना के प्रस्ताव को केंद्रीय जलायोग की तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) की बैठक में पेश किया जाएगा। सिंचाई अधिकारियों का कहना है कि टीएसी की बैठक से पहले पर्यावरणीय आपत्ति का निस्तारण होने की स्थिति में बांध निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा और बांध निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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सिंचाई विभाग जमरानी खंड के ईई जावेद अनवर ने बताया कि जमरानी बांध परियोजना की 2573.10 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्रीय जलायोग को सौंप दी गई है। पूर्व में 2850 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी गई थी, जिस पर केंद्रीय जलायोग ने आपत्ति लगाते हुए शेड्यूल ऑफ रेट (एसओएस) से नई डीपीआर देने को कहा था। पूर्व में प्राइस इंडेक्स के तहत डीपीआर बनाई गई थी। अब 2573.10 करोड़ रुपये की नई डीपीआर पर मंथन हो रहा है। नई डीपीआर पर सहमति बनने पर टीएसी की बैठक में प्रस्ताव पेश होगा। टीएसी की बैठक साल में एक बार होती है। अगर टीएसी की बैठक तक पर्यावरण की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल गई तो बांध परियोजना का निर्माण शुरू हो जाएगा।


केंद्रीय जलायोग को 2573.10 करोड़ की संशोधित डीपीआर सौंपी
अब टीएसी की बैठक में पेश होगा बांध परियोजना का प्रस्ताव

रामपुर, बरेली, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर के कृषि अधिकारियों से कृषि के नए आंकड़े मांगे गए। कृषि निदेशक से नए आंकड़े अनुमोदित कराने के बाद डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी गई। पर्यावरण की स्वीकृति ऑनलाइन मांगी गई है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के निदेशक को पत्र भेजा गया है। बात भी कर ली गई है। जल्द ही पर्यावरण की स्वीकृति मिलने की उम्मीद है। नई डीपीआर स्वीकृत होते ही बांध निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
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- संजय शुक्ल, एसई जमरानी खंड।

सौंग बांध की तर्ज पर बनेगा जमरानी
जमरानी खंड के एसई संजय शुक्ल का कहना है कि जमरानी बांध सौंग बांध की तर्ज पर बनेगा। दोनों ही बांध सरकार के एजेंडे में हैं। इन्हें जल्द ही प्रशासनिक स्वीकृति मिलने की संभावना है।

1989 में भी मिली थी बांध की मंजूरी
जमरानी खंड के ईई जावेद अनवर ने बताया कि 1989 में भी जमरानी बांध परियोजना को मंजूरी मिल गई थी। लेकिन तब इस प्रतिबंध के साथ मंजूरी मिली थी कि वन, पर्यावरण की आपत्तियों का निस्तारण करा लिया जाए, लेकिन दोनों ही आपत्तियों का निस्तारण न होने से बांध निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया था।

औपचारिक मात्र है पर्यावरणीय आपत्ति का निस्तारण
पर्यावरणीय क्लीयरेंस पर मामला औपचारिकता मात्र है। सभी काम पूरे कर लिए गए हैं। आन लाइन स्वीकृति मिलते ही बांध परियोजना को बजट जारी होने की उम्मीद है।

- केंद्रीय जलायोग को सौंपी 2573.10 करोड़ की फाइनल डीपीआर
- जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
- सिंचाई विभाग ने 1981 में गौला बैराज का निर्माण किया। बैराज, 440 किमी नहरों, जमरानी कॉलोनी आदि के निर्माण में 25.24 करोड़ रुपये खर्च किए।
- 1989 में 144.84 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी भेजी गई। इस बीच बांध परियोजना की स्वीकृति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तमाम आपत्तियां लगती रहीं।
- 2015 में परियोजना की लागत 2350 करोड़ रुपये पहुंच गई।
- 20 जुलाई 2018 में 2850 करोड़ रुपये की डीपीआर संशोधित कर अब 2573.10 करोड़ की डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी गई है।

जमरानी बांध की विशेषता
- 9 किमी लंबा, 130 मीटर चौड़ा, 485 मीटर ऊंचा बनेगा बांध
- 368 हेेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला है
- 142.3 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा बांध से
- 42.7 एमसीएम पानी शुद्ध पेयजल के लिए मिलेगा
- उत्तरप्रदेश को 61 एमसीएम, 38.6 एमसीएम पानी उत्तराखंड को सिंचाई के लिए मिलेगा
- 14 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन

129 परिवारों का होना है विस्थापन
जमरानी बांध परियोजना के स्वीकृत होने पर 129 परिवारों का विस्थापन होना है। सिंचाई विभाग विस्थापितों को भूमि उपलब्ध नहीं करा पाने की स्थिति में मौजूदा बाजार दर पर उन्हें मुआवजा देगा।
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विस्थापित होने वाले गांव
गांव का नाम कृषि भूमि की जरूरत विस्थापित होने वाले परिवारों की संख्या कुल जनसंख्या
तिलवाड़ी 9890 हेक्टेयर 33
मुरकुदिया 20800 हेक्टेयर 56
गंदराद 9100 हेक्टेयर 8
पनियाबोर 4000 हेक्टेयर 8
उदवा 2800 हेक्टेयर 8
पस्तोला 6800 हेक्टेयर 16
कुल 47390 हेक्टेयर 129 688
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