हल्द्वानी। एक ओर प्रदेश सरकार केंद्र से ग्रीन बोनस देने की मांग करती है, दूसरी तरफ जंगलों में हरियाली बढ़ाने के लिए धेला भी नहीं देती है वो भी तब जब जंगल के पेड़ों से हर साल करोड़ों की आय होती है।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग में इमारती लकड़ी के लिए उत्पादन किया जाता है। यहां पापुलर, यूकेलिप्टिस, शीशम, सागौन, खैर, कंजू, मुटेल, बांस के पौधे रोपे जाते हैं। इन पेड़ों से हर साल करोड़ों की आय होती है। इधर बारिश का सीजन शुरू हो चुका है और वन प्रभाग को बीज बुआन और पौधे रोपने के लिए बजट नहीं मिला है। वन अधिकारी जैसे तैसे उधारी में बीज बुआन का काम शुरू करा दिया है।
5 रेंज में 338 हेक्टेयर में होगा पौधा रोपण
तराई केंद्रीय की टांडा, हल्द्वानी, बरहैनी, गदगदिया, भाखड़ा के 338 हेक्टेयर वन भूमि पर बीज बुआन और पौधे रोपे जाएंगे। एक हेक्टेयर में 2,000 बीज बुआन और 500 पौधे रोपे जाते हैं इस तरह कुल 8.45 लाख पौधे बनाए जाएंगे। पिछले साल समय से बजट नहीं मिलने पर दो लाख पौधे नहीं रोपे गये थे।
58 करोड़ की होगी आय
वन विभाग को पेड़ों के कटान से इस साल 29 करोड़ की आय हुई है। सात साल बाद 8.45 लाख पेड़ों से तकरीबन 58 करोड़ की आय होने का अनुमान है।
बीज बुआन के लिए बजट नहीं मिला है, बारिश शुरू हो चुकी है इसलिए जैसे तैसे काम शुरू करा दिया गया है।
- कल्याणी नेगी, डीएफओ, तराई केंद्रीय