रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी में उपेक्षित पड़े ब्रिटिशकालीन पैदल मार्गों के दिन के बहुरने की उम्मीद है। छावनी परिषद ने इन पैदल मार्गों को फिर से दुरुस्त करने की पहल शुरू कर दी है। इसके अलावा क्षेत्र में जीर्ण-शीर्ण हो चुके प्राचीन नौले-धारों का भी जीर्णोद्धार होगा। मालूम हो कि अंग्रेजों ने पर्यटन नगरी में कई पैदल रास्तों का निर्माण कराया था, लोग सुबह और शाम इन मार्गों से होकर प्रकृति का लुत्फ उठाते थे और स्वच्छ हवा लेते थे, लेकिन लंबे समय से यह मार्ग जीर्ण-शीर्ण हालत में पड़े हुए थे।
1869 में अंग्रेजों ने रानीखेत की प्राकृतिक सौंदर्य को देखते हुए यहां छावनी बसाई, इस बीच जंगलों के बीच कई बंगलों का निर्माण किया गया। प्रत्येक बंगले को सड़क से जोड़ा गया है। ट्रैकिंग के लिए जंगलों के बीच कई पैदल रास्तों का निर्माण भी कराया। आजादी के बाद इन पैदल रास्तों को लोग इस्तेमाल करते थे, यहां पहुंचने वाले सैलानी भी इन रास्तों से होकर जंगलों के सौंदर्य का लुत्फ उठाते थे, लेकिन वन्य जीवों के आतंक के चलते धीरे-धीरे पैदल रास्तों का प्रयोग कम होने लगा और यह रास्ते बिच्छू घास और झाड़ियों से पट गए।
अब लोग इन रास्तों से होकर जाने से भी डरते हैं। अब छावनी परिषद ने खस्ताहाल पैदल रास्तों को दुरुस्त करने की पहल शुरू कर दी है। मालरोड सहित तमाम स्थानों से इसका कार्य शुरू हो चुका है। वार्ड संख्या सात में सभासद सुकृत शाह की देखरेख में पैदल रास्ते की छावनी कर्मचारियों ने मरम्मत की।