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राज्य के डिग्री कालेजों में जितनी सीटें उतने ही होंगे एडमिशन: उच्चशिक्षामंत्री

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हल्द्वानी। उच्चशिक्षामंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि डिग्री कॉलेजों में जितनी सीटें उतने ही एडमिशन लिए जाएंगे। अगर किसी कॉलेज ने क्षमता से ज्यादा एडमिशन किए तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोई विद्यार्थी उच्चशिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। जिस महाविद्यालय में छात्र-छात्राआें का ज्यादा दबाव होगा वहां पर या तो अतिरिक्त कक्ष बनाए जाएंगे या फिर नजदीकी महाविद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा।
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उच्चशिक्षामंत्री ने यह बात शुक्रवार को यहां एमबीपीजी कॉलेज में छात्रों की समस्याएं सुनने के बाद कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर सेमेस्टर प्रणाली लागू करने में काफी दिक्कतें सामने आ रही हैं।

सरकार का मानना है कि सेमेस्टर प्रणाली पीजी में तो चल सकती है लेकिन स्नातक स्तर की कक्षाओं में संभव नहीं है। इसकी बड़ी वजह राजकीय महाविद्यालयों में सुविधाओं का अभाव है। तमाम ऐसे राजकीय महाविद्यालय हैं जहां न पर्याप्त फर्नीचर है, न पढ़ने के लिए पर्याप्त किताबें और न ही कक्ष। सरकार ने राजकीय महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली खत्म करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है जो छात्रों के सुझाव भी लेगी। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इस पर फैसला लेगी।
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डा. रावत ने कहा कि महाविद्यालयों में पुस्तकों की समस्या का समाधान करने के मकसद से पुस्तक महादान अभियान की शुरूआत की जा रही है, आगामी 15 अप्रैल को प्रदेश के राज्यपाल डा. केके पाल थैलीसैंण महाविद्यालय से इस पुस्तक महादान अभियान का शुभारंभ करेंगे। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्चशिक्षामंत्री पुस्तक महादान अभियान में अपनी ओर से एक-एक लाख रुपये पुस्तकों के लिए देंगे।

उन्होंने कहा कि इस अभियान में महाविद्यालयों के शिक्षक भी इच्छानुसार एक दिन का वेतन और छात्र कम से कम एक - एक पुस्तक दान करने का संकल्प लें। उच्चशिक्षामंत्री ने बताया कि किराये के भवन में चलने वाले 17 महाविद्यालय दो माह के भीतर अपने भवनों में शिफ्ट हो जाएंगे। निदेशालय से 25 महाविद्यालयों के नये भवनों का प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया है।

प्रदेश के 18 महाविद्यालयों के लिए भूमि का चयन हो गया है तथा महाविद्यालयों को सुविधाएं युक्त किए जाने के लिए सरकार एडीबी से 568 करोड़ धनराशि ले रही है। इस दौरान प्रभारी उच्चशिक्षा निदेशक डा. सविता मोहन, सहायक निदेशक डा. अनुराग अग्रवाल, प्रभारी प्राचार्य डा. विनय विद्यालंकार आदि मौजूद रहे।
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