अल्मोड़ा। सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा ने दहेज हत्या के मामले में विवाहिता के पति और सास को दोषी पाया है। इस मामले में सजा बुधवार को सुनाई जाएगी।
अभियोजन के अनुसार मृतका आशा देवी पुत्री लीलाधर निवासी रतखेल, बसई स्याल्दे का विवाह दीपक रिखाड़ी पुत्र शिव दत्त रिखाड़ी निवासी गोलना, कुमालेश्वर तहसील स्याल्दे के साथ 15 मई 2015 को हुआ था। आरोप है कि पति दीपक रिखाड़ी और सास सरस्वती देवी आशा देवी को दहेज के लिए परेशान करते थे।
25 जुलाई 2017 को विवाहिता की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी। मृतका की माता देवकी देवी ने घटना की रिपोर्ट पटवारी क्षेत्र कुमालेश्वर में दर्ज कराई। रिपोर्ट में कहा गया है कि आशा के ससुराल वालों ने पांच घोड़े खरीदे थे और घोड़ों का कर्जा चुकाने के लिए पीड़िता के मायके से पैसा मांगा करते थे। इसे लेकर आशा का भी उत्पीड़न किया जाता था।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया था कि इसी के चलते आशा की हत्या कर दी गई। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304बी, 302, 315 और 498ए के तहत मामला दर्ज किया गया। मामला सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र शर्मा की अदालत में चला। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैलवाल एवं विशेष लोक अभियोजक सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी भूपेंद्र कुमार जोशी ने पैरवी की।
सत्र न्यायाधीश ने आरोपी दीपक रिखाड़ी को धारा 302, 315 और 498 ए में दोषी पाया है, जबकि सरस्वती देवी को धारा 498ए में दोषी पाया है। प्रत्यक्ष रूप से दहेज की मांग करने का आरोप साबित नहीं होने पर दोनों आरोपियों को धारा 304 बी के आरोप से दोषमुक्त किया गया है। बहस के बाद सजा बुधवार 28 मार्च को सुनाई जाएगी।