हल्द्वानी। हाइकोर्ट में आईएसबीटी मामले में जनहित याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार होने के बाद सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि आईएसबीटी का निर्माण क्यों रोका गया है, इसका जवाब देना सरकार को भारी पड़ सकता है। कांग्रेस ने भी इस सवाल को बार-बार उठाया लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया था। अब देखना होगा कि 21 मार्च को सरकार कोर्ट में क्या जवाब दाखिल करती है।
भाजपा संगठन गौलापार में आईएसबीटी का शुरू से विरोध करता रहा है। इसके लिए संगठन ने सरकार पर लगातार दबाव बनाया। संगठन का तर्क था कि गौलापार आईएसबीटी के लिए असुरक्षित जगह है। सरकार अधिकारिक तौर पर इस बात को नहीं कह पाई और गौलापार स्थित आईएसबीटी का काम रुकवा दिया। सरकार ने इसे रोकने का कोई ठोस जवाब अब तक नहीं दिया है।
पीआईएल लगने के बाद अब देखना है कि सरकार हाइकोर्ट को आईएसबीटी का काम क्यों रोका गया इसका क्या जवाब देती है। वन विभाग के अधिकारी दबे जुबान इस बात को कह रहे हैं कि एक परियोजना के लिए वन मंत्रालय दो बार जमीन नहीं दे सकता। न ही इस पर पर्यावरणीय अनुमति मिल सकती है।