जो नलकूप किसी काम के नहीं रह गए हैं, अब उन्हीं से वर्षा जल संरक्षण होगा। लगातार गिर रहे भूजल स्तर को रिचार्ज करने में भी इनका इस्तेमाल किया जाएगा। कुमाऊं में पहली बार इस तकनीक को अपनाकर भूजल स्तर में हो रही गिरावट को रोकने की पहल की गई है। पेयजल निगम ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। सिंचाई, जल संस्थान से निष्क्रिय नलकूपों की सूची मांगी गई है। सूची मिलने के बाद निष्क्रिय नलकूपों का सर्वे करने के बाद काम शुरू किया जाएगा।
तकनीक ऐसे काम करेगी
पेयजल निगम के मुताबिक भूजल स्तर रिचार्ज करने के लिए निष्क्रिय नलकूप, आसपास के मकानों की छतों से बारिश के पानी को एक पाइप लाइन के जरिये नलकूप तक पहुंचाया जाएगा। यहां फिल्टर मीडिया के जरिये गंदे पानी को शुद्ध किया जाएगा। स्वच्छ पानी को नलकूप की बोरिंग के जरिये जमीन के अंदर छोड़ा जाएगा। लगातार बारिश का पानी जमीन के अंदर पहुंचने से जल स्तर बढ़ने में मदद मिलेगी।
दून के जौलीग्रांट अस्पताल से सुझाव आया
देहरादून के जौलीग्रांट अस्पताल में इस तकनीक के जरिये ही एक नलकूप को रिचार्ज किया गया है। अस्पताल में दो नलकूप लगे हैं। इनमें एक नलकूप से अस्पताल, आसपास की छतों से बारिश के पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने का काम लिया जाता है। इससे जो भूजल स्तर बढ़ता है, दूसरे नलकूप से पानी निकाल लिया जाता है। वहां वर्षा जल संरक्षण का इतना फायदा मिला है कि गर्मी में पानी का संकट नहीं होता।
निष्क्रिय नलकूपों की बोरिंग से नलकूप, आसपास की छतों के बारिश के पानी को शुद्ध कर जमीन के अंदर छोड़ा जाएगा। इससे लगातार गिर रहे भूजल स्तर रिचार्ज करने में काफी मदद मिलेगी।
- सचिन कुमार, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम हल्द्वानी।