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मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला ः 99 से हुई पूछताछ फिर खाली हाथ

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हल्द्वानी। रैगिंग को लेकर यूजीसी में हुई शिकायत मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के गले की फांस बन गई है। रैगिंग की शिकायत करने वालों ने अपना नाम नहीं लिखा है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन प्रथम वर्ष के 99 बच्चों से पूछताछ कर चुका है। अब एंटी रैगिंग कमेटी की 18 सितंबर को बैठक बुलाई गई है।
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एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के दो छात्रों पर रैगिंग करने आरोप लगाया था। यूजीसी में शिकायत दर्ज कराते हुए कपड़े फाड़ने और गाली-गलौज करने की बात लिखी। हालांकि पीड़ित ने अपना नाम नहीं लिखा है। शिकायत होने के बाद प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने हास्टल में गहन पड़ताल की। साथ ही द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं से पूछताछ की। उन्होंने आरोपी दो छात्रों से भी बात की। डॉ. भैसोड़ा के अवकाश पर जाने के बाद प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके सिंह ने एमबीबीएस प्रथम वर्ष के 99 छात्र-छात्राओं से पूछताछ की। डॉ. सिंह का कहना है कि कुछ ने रैगिंग होने की बात स्वीकार है जबकि कुछ छात्र-छात्राओं ने इंकार किया है।
प्राचार्य डॉ. भैसोड़ा का कहना है कि छात्र-छात्राएं लिखकर दे रहे हैं कि कुछ नहीं हुआ है। 18 सितंबर को शाम चार बजे से राजकीय मेडिकल कॉलेज में एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है। बैठक में सारे तथ्यों को परखने के बाद निर्णय लिया जाएगा। डॉ. भैसोड़ा रैगिंग से इंकार कर रहे हैं जबकि प्रभारी प्राचार्य डॉ. सिंह कुछ छात्र-छात्राओं द्वारा रैगिंग होने की बात कह रहे हैं। सवाल यह उठता है कि दोनों के बयानों में विरोधाभास क्यों हैं।
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कल होगी एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक, शिकायतकर्ता ने नहीं लिखा है अपना नाम


ऑनलाइन फार्म भराएंगे
हल्द्वानी। कॉलेज में रैगिंग न करने को लेकर छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों से शपथ पत्र लिया जाता है। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने कहा कि रैगिंग करने वाले के खिलाफ होने वाली कठोर कार्रवाई से भी छात्र-छात्राएं वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि अब छात्र-छात्राओं से दोबारा रैगिंग न करने को लेकर ऑनलाइन फार्म भराया जाएगा।
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