रानीखेत (अल्मोड़ा)। पृथक रानीखेत जिले के आंदोलन ने रफ्तार पकड़ ली है। आंदोलन के लिए गठित संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने गांवों और कस्बों में जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है। जहां आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई सेवानिवृत्त और जनप्रतिनिधियों ने भी खुलकर समर्थन देने का एलान कर दिया है। टीम ने यहां मजखाली और इससे लगे आसपास के इलाकों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाकर समर्थन मांगा।
मोर्चा से जुड़े व्यापार संघ अध्यक्ष भगवंत नेगी, अतुल जोशी, संजय रौतेला आदि वक्ताओं ने कहा कि रानीखेत जिले की मांग सबसे पुरानी है। 1955 के बाद लगातार पृथक जिले की मांग उठती रही है। इसके लिए कई बार बड़े आंदोलन हुए, लेकिन हर बार सरकारों ने क्षेत्र की जनता को गुमराह किया, लेकिन आज तक जिला अस्तित्व में नहीं आया। 2011 में तत्कालीन सरकार ने घोषणा तो की, लेकिन अमलीजामा नहीं पहनाया, इसके बाद कि सरकारें भी झूठे आश्वासनों के माध्यम से छलती रहीं। इस दौरान हिम्मत सिंह, महेश सिंह, नंद राम, कृपाल सिंह, राजेंद्र राम, दीपक अग्रवाल, धीरज बिष्ट, दिवान सिंह, विनोद कांडपाल आदि मौजूद थेे।