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उप्र और उतराखंड के वन अफसरों की गश्त

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हल्द्वानी। जंगलों में वन्य संपदा और वन्यजीवों के शिकार, तस्करी रोकने को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की संयुक्त गश्त पर वन अफसर सोशल मीडिया से निगहबानी करेंगे। दोनों प्रदेशों का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप के जरिये दोनों प्रदेशों के आला अफसर संयुक्त गश्त समेत अन्य गतिविधियों पर भी निगाह रखेंगे।
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हाल ही में अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में यूपी, उत्तराखंड के वन विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक हुई थी। इस बैठक में दोनों प्रदेशों की सीमा से सटे जंगलों में संयुक्त गश्त का फैसला हुआ था। इधर व्हाट्सएप पर दोनों प्रदेशों के वन अफसरों का एक संयुक्त ग्रुप बनाया गया है। इस ग्रुप में दोनों प्रदेशों के प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक से रेंजर स्तर के अधिकारियों को जोड़ा है। इस ग्रुप में शिकारियों, तस्करों को पकड़ने के लिए सूचनाओं के आदान, प्रदान कर दूसरी गतिविधियों भी साझा होंगी। आला अफसर ग्रुप में दी जाने वाली इन सूचनाओं से निचले अधिकारियों की सक्रियता, आपसी समन्वय, संयुक्त गश्त पर निगरानी करेंगे। वहीं लापरवाही मिलने पर ग्रुप में ही हिदायत भी दी जा सकती है। तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ नीतिश मणि त्रिपाठी ने बताया कि बिजनौर जिले के नजीबाबाद में गश्त शुरू हो गई है। इसके लिए बने व्हाट्सएप ग्रुप में सूचनाएं आदान-प्रदान की जा रही हैं।

राजस्व क्षेत्र में भी होगी जंगलात की गश्त
आमतौर पर वन विभाग सिर्फ वन, आरक्षित वन में ही गश्त करता है। राजस्व क्षेत्र का जिम्मा पुलिस, प्रशासन पर रहता है। यह पहली बार है जब दोनों प्रदेशों के वन अफसर राजस्व क्षेत्र में भी गश्त करेंगे।
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