नैनीताल। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर होमगार्डों को पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के समान दैनिक वेतन भत्ता देने पर आठ सप्ताह में विचार करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी शिव प्रसाद और अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था होमगार्डों को भी पुलिस की तरह वेतन भत्ता दिया जाए। पूर्व में उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने होमगार्डों को भी पुलिस के सामान वेतन व अन्य सुविधाएं देने का आदेश प्रदेश सरकार को दिया था।
इस आदेश को सरकार ने चुनौती दी थी। मंगलवार को खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर पुलिस वालों के न्यूनतम वेतन की तरह ही होमगार्डों को आठ सप्ताह के भीतर दैनिक भत्ता देने पर विचार करे।
वेतन भत्तों को लेकर ही हिमाचल और पंजाब के होमगार्ड सर्वोच्च न्यायालय पहुंचे थे। उस समय सर्वोच्च न्यायालय ने होमगार्डों को नियमित करने से इंकार किया था लेकिन साफ किया था कि गृह रक्षकों को पुलिस कर्मियों के न्यूनतम वेतन के समान ही दैनिक वेतन भत्ता दिया जाए। प्रदेश में इस समय 6411 होमगार्ड हैं।
उच्च न्यायालय ने सरकार को आठ सप्ताह का समय दिया
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर लिया जाए फैसला
प्रदेश के छह हजार से अधिक होमगार्डों को हो सकता है फायदा