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काठगोदाम डिपो से मार्च में 250 ‘सांसदों’ ने की यात्रा

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हल्द्वानी। काठगोदाम डिपो की बसों में मार्च में 250 लोगों ने सांसद कोटे से यात्रा की। इससे निगम को करीब 35 हजार का नुकसान हुआ है। सवाल उठ रहे हैं कि एक माह में इतने मामले आने के बाद भी उच्च अधिकारियों की नजर इस मामले में क्यों नहीं गई। क्या उच्च अधिकारी इस मामले को अनदेखी करते रहे या फिर उन्होंने रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने के दौरान इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
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22 मार्च को मुख्यालय की ओर से ऑनलाइन टिकट के कोड बदले गए। 12 नंबर में पहले वरिष्ठ नागरिक था। इसे 22 मार्च की रात बदलकर सांसद कोटे में डाल दिया गया और 13 नंबर कोड वरिष्ठ नागरिकों को आवंटित कर दिया गया। साथ ही इसकी जानकारी परिचालकों को नहीं दी गई।

सूत्रों की माने तो एक मार्च से 31 मार्च तक काठगोदाम डिपो की बसों में 250 लोगों ने सांसद कोटे से यात्रा की। इसमें से अधिकांश केस 23 मार्च के बाद के हैं। लेकिन 23 मार्च से पहले भी कई ऐसे मामले पकड़ में आए हैं, जिनमें सांसदों ने यात्रा की है।
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दो दिन मुख्यालय की टीम ने हल्द्वानी-काठगोदाम में की जांच
रोडवेज मुख्यालय से आई टीम ने दो दिन काठगोदाम और हल्द्वानी डिपो में सांसद और अन्य कोटे में काटे गए टिकटों के बारे में जानकारी जुटाई। साथ ही अपने साथ पूरी रिपोर्ट लेकर देहरादून को रवाना हो गई। सूत्रों की मानें तो टीम को दोनों डिपो में सांसद के अलावा आर्मी वारंट के बड़ी मात्रा में मामले पकड़ में आए हैं।

टिकट मशीन नहीं ईवीएम हो गई
काठगोदाम डिपो के एआरएम देशराज अंबेडकर ने पहले कोई जानकारी होने से इंकार किया। कुरेदने पर उन्होंने रोडवेज की टिकट मशीनों की तुलना ईवीएम से की। अधिकारी का कहना था कि ईवीएम की तरह से इन टिकट मशीनों मेें कोड बदलने से टिकट कि सी अन्य का ही कट जा रहा है।
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