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रिवर ट्रेनिंग के नाम पर खनन की छूट

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माफिया से होगी वसूली - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। सरकार की ओर से जारी नई रिवर ट्रेनिंग नीति एक बार फिर खनन की छूट दे दी गई है। पुरानी नीति को जस का तस लागू किया गया है। बदलाव है तो इतना कि रिवर ट्रेनिंग के लिए खुली बोली लगेगी।
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तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने अगस्त 2016 में रिवर ट्रेनिंग नीति जारी की थी। इस नीति के तहत नदी, नालों, जंगल में जहां भी जमा उप खनिज से जन धन हानि की आशंका है। वहां जिलाधिकारी के यहां आवेदन कर उप खनिज के खनन का प्रावधान था। नई नीति में इस प्रावधान को भी जस का तस रखा गया है।

इस प्रावधान का दुरुपयोग किया गया था। नीति में स्पष्ट किया गया है कि यथासंभव मानव श्रम का प्रयोग होगा। यह पाया गया था कि रिवर ट्रेनिंग के नाम पर जेसीबी लगा कर खनन किया गया। आरक्षित जंगल में भी रिवर ट्रेनिंग के आवेदन दिए गए। सत्ता में आने के बाद त्रिवेंद्र रावत सरकार ने जनवरी 2018 में रिवर ट्रेनिंग में रोक लगा दी थी। इसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी नीति में संशोधन कर बाढ़ सुरक्षा के लिए जिम्मेदार सिंचाई विभाग को जिम्मा सौंपा जा सकता है। नई नीति में आवेदकों को खुली बोली लगानी होगी। यानी एक बेस प्राइज तय किया जाएगा इससे ऊपर बोली लगाई जाएगी।
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समिति करेगी संवेदनशील इलाकों का चयन
डीएम की अध्यक्षता में एसडीएम अध्यक्ष, डीएफओ प्रतिनिधि, सिंचाई एई, भू वैज्ञानिक, खान अधिकारी सदस्यता वाली समिति बनाई है। यह समिति नदी, नालों में संवेदनशील स्थानों को चिन्हीकरण करेगी।

रिवर ट्रेनिंग के नाम पर खोद दी थी जमरानी
जमरानी में रिवर ट्रेनिंग के पट्टों के नाम पर नदी के किनारों तक को खोद दिया गया था। हालत इतनी बदतर थी कि माफिया हैड़ाखान तक खुदाई करने पहुंच गए। वहां दिन रात खनन किया जा रहा था। इसको अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था फिर वहां टीम ने छापामारी की थी।

क्या है रिवर ट्रेनिंग
- नदी से उप खनिज निकाल कर या तटबंध आदि बना कर नदी को अपने प्राकृतिक स्वरूप में रहने देना ही रिवर ट्रेनिंग है। साफ है कि यह काम नदी को समझने वाले विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जा सकता है।
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