भीमताल (नैनीताल)। अपना कुनबा बढ़ाने के लिए लंबी पूंछ वाली ब्रॉडबिल चिड़िया हिमालय की उच्च वादियों से लंबी उड़ान भरकर सात ताल के जंगलों में तीन महीने के लिए मेहमान के रूप में पहुंच चुकी है। इस चिड़िया ने अंडे रखने के लिए घोंसलों का निर्माण शुरू कर दिया है। इस सुंदर चिड़िया को अपने कैमरे में कैद करने के लिए देश के साथ-साथ विदेशी पर्यटक भी आजकल यहां डेरा जमाए हुए हैं।
पक्षी प्रेमी कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. आशीष बिष्ट के अनुसार हिमालय में पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर पाए जाने वाली लौंग टेल्ड ब्रॉडबिल चिड़िया हर साल प्रजनन के लिए मार्च के अंतिम दिनों में यहां पहुंचने लगती है। इस बार भी यह सुंदर चिड़िया सात ताल के जंगलों में चौड़ी पत्तियों वाले पेड़ों पर अपना घोंसला बनाने लगी है। तीन माह के अंतराल में अंडों से बच्चे निकलने के बाद यह परिवार समेत फिर से हिमालय में अपने ठिकाने पर लौट जाएगी। यह चिड़िया सातताल में जून तक मेहमान बनकर रहेगी।
सात ताल के जंगलों में प्रजनन के लिए बनाए घोंसले
तीन माह के लिए मेहमान रहेगी यह चिड़िया, विदेशी पर्यटक भी ले रहे फोटोग्राफी का लुत्फ
ब्रॉड बिल की यह है खासियत
ब्रॉड बिल चिड़िया की चोंच चौड़ी, पूंछ लंबी, सिर पर कैप और रंग हरा होता है। एक बार में यह पांच बच्चों को जन्म देती है। यह पेड़-पौधों में लगे कीड़े-मकोड़ों को खाकर अपना पेट भरती है। इसकी आवाज बेहद सुरीली होती है। ठंड के मौसम में यह निचले क्षेत्र में रहना पसंद करती है। भारत में यह चिड़िया हिमालयी राज्यों उत्तराखंड, सिक्किम, असम के साथ ही नेपाल, भूटान, मलेशिया, इंडोनेशिया में भी पाई जाती है।
शोरगुल के कारण चिड़ियों की संख्या में आ रही गिरावट
डॉ. आशीष बिष्ट, नीर बनकोटी, विक्रम सिंह कंडारी और प्रभु हजारा बताते है कि लंबी पूंछ वाली ब्रॉडबिल चिड़िया को शांत जगह में रहना पसंद है। कुछ सालों से इस चिड़िया की फोटोग्राफी करने के उद्देश्य से सैलानियों की जंगलों में आवाजाही और शोरगुल के कारण इनकी संख्या में गिरावट आ रही है। साथ ही जंगलों में आग लगने, वन्य जीवों का शिकार होने, वनों का कटान होने, जंगलों में भवन निर्माणों से इनके अस्तित्व में खतरा मंडराने लगा है।