हल्द्वानी। जिला सहकारी बैंक की शाखाओं ने विभिन्न योजनाओं में जमकर ऋण बांट दिए, लेकिन वसूली करने में पसीने छूट रहे हैं। आलम यह है कि बैंक का कुल एनपीए (नॉन परफार्मिंग एस्सेट)11 करोड़ 61 लाख रुपये जा पहुंच चुका है। पिछले साल के मुकाबले इस साल वसूली में पौने चार फीसदी कमी आई है। बैंक महाप्रबंधक ने शाखा प्रबंधकों को समीक्षा बैठक में वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। चेताया कि अगले वित्तीय वर्ष तक एनपीए में वृद्धि नहीं होनी चाहिए।
31 मार्च 2016 को बैंक का कुल एनपीए 1128.78 लाख रुपये था लेकिन इस साल मार्च तक एनपीए 1247.56 लाख था, जो जुलाई तक वसूली के बाद 1160.60 लाख हो गया। शाखाएं कुल मिलाकर 6.89 फीसदी वसूली ही कर सकी। स्थिति यह रही कि हल्दूचौड़ की शाखा को छोड़कर कोई भी शाखा भी शाखा 40 फीसदी वसूली तक नहीं कर सकी। वर्तमान में 31 शाखाओं में सबसे ज्यादा रामनगर मुख्य शाखा पर 192.59 लाख का एनपीए है जबकि वसूली की दर महज पौने छह फीसदी है। इसी तरह रामनगर की पैठपड़ाव शाखा पर एनपीए 141.88 लाख है, जबकि वसूली महज पौने तीन फीसदी ही हुई है। हल्द्वानी नगर शाखा का एनपीए दो लाख रुपये है, जबकि वसूली शून्य है। हालांकि दोनहरिया, ट्रांसपोर्टनगर, पीलीकोठी शाखा में एनपीए की राशि शून्य है। महाप्रबंधक सीके कमल ने बताया कि एनपीए बढ़ने की एक वजह नोटबंदी भी रही है। सभी बैंक प्रबंधकों को बकायदारों से वसूली और आरसी फाइल करने के निर्देश दिए गए हैं।
लोन में गड़बड़ी की भी थी शिकायतें
जिला सहकारी बैंक की कुछ शाखाओं में ऋण वितरण में गड़बडी की शिकायत मिली थी। यह शिकायतें आई तो कुछ साल पहले थी, लेकिन जांच तक ही सिमटकर रह गई। एनपीए में बड़ी मात्रा में ऐसी राशि है, जो वसूल नहीं हो पा रही है। रामनगर शाखा में तो कईं ऐसे मामले हैं, जिनमें ऋण लेने वाले कोर्ट की शरण में गए हैं। कुछ दिन पहले ही कोर्ट ने दो भाइयों की याचिका को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद दोनों भाइयों ने कईं साल पुराना ऋण चुका दिया। वहीं रामनगर में कईं अपात्र लोगों को भी ऋण बांटने की शिकायतें थी। महाप्रबंधक सीके कमल कहते हैं कि जब तक किसी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट नहीं दाखिल होती, तब तक उसे गलत नहीं कह सकते हैं। ऋण संबंधी कुछ मामलों की जांच की जा रही है।