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25 वर्षों से लंबित है 22 करोड़ का अवशेष

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हल्द्वानी। आरटीआई से जलसंस्थान का उपभोक्ताओं पर बकाया 22 करोड़ रुपये के संदर्भ में महाप्रबंधक ने ईई से स्पष्टीकरण मांगा है। ईई ने जीएम को भेजे स्पष्टीकरण में कहा है कि हल्द्वानी जलसंस्थान के उपभोक्ताओं पर बकाया 22 करोड़ रुपया पिछले 25 वर्षों से चला आ रहा है। अभियंताओं की टीम गठित कर बकाया वसूली के प्रयास किए जा रहे हैं।
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जीएम को भेजे पत्र में जलसंस्थान के ईई संतोष कुमार उपाध्याय ने कहा है कि आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत गौनिया द्वारा 22 करोड़ रुपया अवशेष की जो सूचना मांगी गई है वह 20 से 25 वर्षों से लंबित है। इस राशि में 2013 से 2015 के बीच पांच प्रतिशत प्रतिमाह विलंब शुल्क भी शामिल है। नगर क्षेत्र में अधिकांश नजूल भूमि होने के कारण कुछ भवन जो खंडहर हो चुके हैं, उनकी बिलिंग हो रही है। उनमें विलंब शुल्क भी जुड़ रहा है। बस्ती क्षेत्र, नजूल भूमि में वास्तविक स्वामित्व न होने के कारण मात्र 100 रुपये के स्टांप पेपर पर संपत्ति की खरीद एवं बिक्री हो जाती है। उपभोक्ता अपने पहचान पत्र एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर पानी का नया कनेक्शन लेता है। ऐसे में पुराने जल संयोजन विच्छेदित न होने के कारण अवशेष राशि में वृद्धि होती रहती है। सरकारी विभागों द्वारा भुगतान न करने के कारण भी अवशेष राशि में वृद्धि हो रही है। आरसी जारी करने पर प्रशासन द्वारा आरसी प्राप्तकर्ता की मृत्यु होने अथवा संबंधित पते पर न रहने की जानकारी मिल रही है। घर-घर संपर्क के दौरान बकाया जमा नहीं करने वालों के कनेक्शन काटे जाते हैं। 20-25 वर्ष पूर्व स्वीकृत कनेक्शनों में कई उपभोक्ताओं के पते अपूर्ण होने के कारण भी वसूली नहीं हो रही है। अवशेष बकाया वसूली के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अभियंताओं की टीम गठि कर वसूली अभियान चलाया है। बड़े बकाएदारों से व्यक्तिगत संपर्क भी किया जा रहा है।
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जलसंस्थान के ईई ने महाप्रबंधक को भेजा पत्र
महाप्रबंधक ने ईई से मांगा है स्पष्टीकरण
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