हल्द्वानी। पुरानी और जीर्णशीर्ण हो चुकी पेयजल लाइनों में लीकेज भी पेयजल संकट की बड़ी वजह है। अधिकारी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि मौजूदा पेयजल लाइनों से पानी संकट से निजात मिलना संभव नहीं है।
शहर की पेयजल योजना 60 साल पुरानी है और मौजूदा आबादी के लिए पेयजल लाइनें छोटी पड़ चुकी हैं। जिस वजह से पेयजल योजना के आखिरी छोर में बसे लोगों को पेयजल आपूर्ति नहीं हो पाती है। टेल एंड के इलाकों में साल भर पेयजल का संकट बना रहता है। पुरानी और जीर्णशीर्ण लाइनें कई स्थानों पर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति पर 20 लीटर पेयजल का लीकेज है। संबंधित विभाग यह स्वीकार कर रहे हैं कि 76 हजार कनेक्शनों में विभागीय मानकों के तहत भी प्रति कनेक्शन पर चार लोगों को निर्भरता मानें तो करीब 50 लाख 80 हजार लीटर पानी लीकेज की वजह से बर्बाद हो रहा है। हकीकत यह है कि जगह-जगह लाइनें लीकेज होने से इससे कहीं अधिक करीब एक करोड़ लीटर से अधिक पानी की बर्बादी रोज हो रही है।
ये है स्थिति...
-जलसंस्थान के पास शहर और ग्रामीण क्षेत्र में 76 हजार कनेक्शन हैं।
-जलसंस्थान को गौला से 34.5 एमएलडी पानी मिल रहा है।
-करीब 45 एमएलडी पानी नलकूपों से मिल रहा है।
-जलसंस्थान को मौजूदा आबादी के लिए 86 एमएलडी पानी की जरूरत है जबकि सभी स्रोतों से जलसंस्थान को 80 एमएलडी पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
-लीकेज की वजह से लोगों को सिर्फ 70 एमएलडी पानी मिल रहा है।
ईई की लाचारी
जलसंस्थान के अधिशासी अभियंता संतोष कुमार उपाध्याय का कहना है कि पेयजल लाइनों के छोटा पड़ने और वितरण व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने की वजह से योजना के बाहरी छोर में पेयजल का संकट है।