हल्द्वानी। प्रधानमंत्री ने 2025 तक टीबी रोग को भारत से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। टीबी रोगियों को इलाज के लिए प्रोत्साहित करने को पोषण सहायता कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। टीबी रोगियों को इलाज की अवधि तक प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
वर्ष 2017 में प्रदेश में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में मिलाकर 22,255 टीबी के रोगी मिले थे। हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में सबसे अधिक मरीज मिले थे। टीबी रोगी कई बार इलाज बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में टीबी को खत्म करने और रोगियों को पूरा इलाज कराने के लिए केंद्र सरकार ने एक अप्रैल से 500 रुपये की पोषण सहायता राशि देने की योजना शुरू की है। योजना की खास बात यह है कि मरीज ने दवा पूरी खाई हो। दवा बीच में छोड़ने या न खाने पर प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी। एक अप्रैल से 27 अप्रैल तक प्रदेश में 442 नए टीबी के मरीज मिले हैं। जबकि नैनीताल जिले में नए और पुराने मरीज मिलाकर संख्या 350 की है। पांच सौ रुपये की पोषण सहायता राशि मरीज के बैंक खाते में जाएगी।
एक अप्रैल से शुरू हुई है योजना, एक से 27 अप्रैल के बीच मिले हैं 442 नए टीबी मरीज
इलाज की पूरी अवधि तक दी जाएगी प्रोत्साहन राशि
ये करना होगा मरीज को
- टीबी रोगी जांच केंद्र से निक्षय पहचान संख्या प्राप्त करें।
- रोगी का आधार कार्ड संख्या।
- बैंक का नाम, खाता संख्या और आइएफएससी कोड।
प्रधानमंत्री 2025 तक देश को टीबी मुक्त करना चाहते हैं। टीबी रोगी को इलाज के दौरान अच्छी खुराक की जरूरत होती है। टीबी रोगी बीच में इलाज छोड़ देते हैं। योजना शुरू होने से जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
-डॉ. डीसी पनेरू, जिला क्षय रोग अधिकारी
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योजना की शुरूआत एक अप्रैल से की गई है। आधे महीने इलाज कराने वाले या दवा या इलाज बीच में छोड़ने वाले मरीज को इसका लाभ नहीं मिलेगा। जो मरीज पूर्व से इलाज करा रहे हैं और अप्रैल में अगर उनके छह माह पूरे हो रहे हैं तो उन्हें एक माह (अप्रैल) की राशि दी जाएगी।
-डॉ. वी काला, राज्य समन्वयक, टीबी रोग