हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में सिर्फ एक माह की दवाएं और जांच किट उपलब्ध हैं। शासन से समय पर खरीद की अनुमति नहीं मिलने पर दवाओं और जांच किटों का संकट खड़ा हो जाएगा। साथ ही कंपनियों के बकाए का भुगतान भी अब शासन की बिना अनुमति के नहीं हो पाएगा।
सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रतिदिन 700 से 1000 मरीज ओपीडी में आते हैं। जबकि 300 से 400 मरीज भर्ती रहते हैं। साथ ही चार सौ मरीजों की विभिन्न जांचें प्रतिदिन होती हैं। शासन ने बिना अनुमति के किसी भी तरह की खरीद पर रोक लगा दी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को अब खरीद से पहले अनुमति लेनी होगी। विभागाध्यक्षों की डिमांड के अनुसार आवश्यक दवाओं से लेकर उपकरण, रीजेंट, किट आदि की खरीद की जाती है। गत वित्तीय वर्ष में साढ़े तीन करोड़ की दवाएं और सर्जिकल आइटम खरीदे गए। एक माह में लगभग 29 लाख रुपये की खरीद हुई। दूसरी ओर पिछले वित्तीय वर्ष और इस तिमाही का मिलाकर सीएमसी के एवज में डेढ़ करोड़, अन्य उपकरण के 70 लाख और सर्जिकल आइटम का 70 लाख रुपये का भुगतान करना है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने कहा कि भुगतान भी बिना शासन की अनुमति के अब नहीं हो पाएगा। साथ ही दवाएं और किट सिर्फ एक माह तक की स्टॉक में हैं।
किट खत्म होने से नहीं हो पाएंगी जांचें, एक वर्ष में खरीदी साढ़े तीन करोड़ की दवाएं व सर्जिकल आइटम
कंपनियों का तीन करोड़ का भी शासन की अनुमति के बिना नहीं होगा भुगतान