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कैलाश मानसरोवर यात्रा को पटरी पर आने में लगेगा समय

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कैलाश मानसरोवर यात्रा - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। कैलाश मानसरोवर यात्रा इस बार तय समय पर और उत्तराखंड के निर्धारित रूट से ही होगी। बुधवार को दिल्ली में विदेश मंत्रालय के साथ हुई बैठक में यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि इस बार यात्रा में गर्बाधार से नजंग तक यात्रियों को वाहन सुविधा का लाभ भी मिल सकता है। सीमा सड़क संगठन ने यात्रा शुरू होने से पहले ही इस सड़क का निर्माण कर लेने का आश्वासन दिया है। यात्रा के दिनों में भी कोई कटौती नहीं की गई है। निर्माणाधीन लखनपुर-नजंग रोड बंद होने की स्थिति में तीर्थयात्रियों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ से गुंजी तक ले जाया जाएगा।
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कैलास मानसरोवर यात्रा के संचालन का जिम्मा कुमाऊं मंडल विकास निगम के पास है। यात्रा में शामिल होने के लिए छह अप्रैल तक ऑनलाइन पंजीकरण किया जा रहा है। केएमवीएन के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने बताया वर्तमान में बीआरओ द्वारा गर्भाधार-लखनपुर, नजंग के बीच मोटर मार्ग के निर्माण का कार्य चल रहा है। दिल्ली में हुई बैठक में तय किया गया कि यदि यात्रा शुरू होने तक उक्त सड़क पूरी तरह बन जाती है तो यात्रियों को सड़क मार्ग से ही गुंजी तक ले जाया जाएगा। यात्रा अवधि के दौरान मौसम खराब होता है या फिर किसी कारण से सड़क बंद हो जाती है तो ऐसी स्थिति में यात्रियों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से पिथौरागढ़ से गुंजी तक ले जा जाएगा।
उन्होंने बताया कि बैठक में तय किया गया कि सड़क मार्ग से यात्रा संचालित होने पर अल्मोड़ा, धारचूला, सिर्खा, गाला, बूंदी, गुंजी, नाभीढांग में यात्रियों के कैंप किए जाएंगे। बैठक में विदेश मंत्रालय के वित्त सचिव, केएमवीएन के महाप्रबंधक (निर्माण) त्रिलोक सिंह मर्तोलिया समेत आईएसबीटी, धारचूला के प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। कैलाश मानसरोवर यात्रा जून से शुरू होती है। यात्रियों को कई दलों में भेजा जाता है।
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